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ई-अटेंडेंस जांच का डर नहीं, पर रोज 7 किमी पैदल चलकर जाते हैं स्कूल
^गोरेलाल का काम सराहनीय है। कठिन परिस्थितियों में भी हौसला नहीं छोड़ा है। शिक्षक ही नहीं इससे हर कोई प्रेरणा ले सकता है।^ -नरेंद्रकुमार शर्मा, बीईओराजपुर ब्लॉक
कुकड़िया पंचायत के अंतर्गत करीब 5 फलिए आते हैं। इसमें 4 स्थानों पटेल फलिया, पुजारा फलिया, बदड़िया फलिया, झवर फलिया पर प्रावि एक स्थान पटेल फलिया में मावि है। इसमें से पटेल फलिए, पुजारा फलिया में एक-एक शिक्षक तथा झवर फलिए में दो शिक्षक तथा बदड़िया फलिया में शिक्षक हीं नहीं है।
5 फलियों में 4 शिक्षक
विशाल जायसवाल/ दीप चौरे |पलसूद/बड़वानी
जिलामुख्यालय से करीब 60 किमी दूर। पलसूद के पास कुकड़ियाखेड़ा ग्राम पंचायत का पुजारा फलिया। यहां पांच साल में कोई अफसर स्कूल की जांच करने नहीं पहुंचा। वजह यहां की दुर्गम पहाड़ियां। एंड्रायड सेलफोन से घबराए शिक्षकों के लिए तो यहां का शासकीय प्राथमिक विद्यालय वरदान से कम नहीं है। यहां नेटवर्क ही नहीं मिलता सो ई-अटेंडेंस भी मुमकीन नहीं। इस स्कूल में तो जांच ही ई-अटेंडेंस से निगरानी का कोई डर है फिर भी संविदा शिक्षक वर्ग 3 में आने वाले गोरेलाल बिल्लौरे पांच साल से रोजाना 7 किमी पैदल चलकर स्कूल जाते हैं। वे कहते हैं यह उनका स्वअनुशासन है। उनके अनुशासन का पता भास्कर को तब चला जब इस फलिए में शिक्षा की जमीनी हकीकत जानने के लिए अचानक स्कूल में दस्तक दी गई। श्री बिल्लौरे पढ़ाने में मगन थे। टाटपट्टी पर बैठे थे करीब 15 बच्चे। क्लास खत्म होने के बाद हमने श्री बिल्लौरे से पूछा तो उन्होंने बताया ये बच्चे भी पांच साल पहले तक नहीं आते थे। स्कूल के लिए वे अकेले शिक्षक नियुक्त हैं। जब ज्वाइन किया तब पालकों के हाथ-पैर जोड़े तब जाकर बच्चे भेजने को राजी हुए। आज उनके पालक भी खुश हैं। तनख्वाह करीब 5 हजार रुपए है। पर पैसे से ज्यादा इन बच्चों का भविष्य मायने रखता है जिनके लिए अब भी शिक्षा का मतलब सरकारी स्कूल और उसके शिक्षक ही हैं।
खरगोनमें परिवार और मास्टरजी रहते हैं जोगवाड़ा में- रामलालभायसिंह ने बताया उनके बच्चे भी स्कूल जा रहे हैं। मास्टरजी का परिवार खरगोन में रहता है लेकिन तीज-त्योहार पर ही जाते हैं। बाकी समय पुजारा फलिया के नजदीकी गांव जोगवाड़ा में कमरा लेकर रहते हैं। उनके पास बाइक नहीं है और पहाड़ियों के बीच बसे स्कूल में साइकिल से नहीं जा सकते इसलिए पैदल ही जाते हैं।