पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • चोरी के खुलासे में इंदौर पुलिस सबसे पीछे

चोरी के खुलासे में इंदौर पुलिस सबसे पीछे

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
10 लाख अपराधियों का डाटा तैयार

क्राइम ब्रांच को देंगे टास्क
जिले में भले ही पुलिस अफसरों की फौज है, लेकिन चोरी की घटनाओं का खुलासा करने में हमारी पुलिस दूसरे जिलों से पीछे है। इंदौर पुलिस सिर्फ 16 प्रतिशत मामले ही ट्रेस कर सकी। उनमें भी 10 फीसदी में माल बरामद हुआ।

भास्कर ने इंदौर जोन के आठ जिले इंदौर, धार, झाबुआ, खंडवा, बड़वानी, आलीराजपुर, खरगोन और बुरहानपुर में वर्ष 2015 में हुए अपराधों की समीक्षा की। इनमें चोरी की घटनाएं इंदौर में सबसे ज्यादा हुईं, लेकिन उनका खुलासा करने में यहां की पुलिस सबसे पीछे रही। बुरहानपुर और आलीराजपुर जैसे जिलों की पुलिस ने 60 से 70 प्रतिशत मामलों का खुलासा किया। इंदौर में बढ़ते अपराधों को लेकर तरह-तरह के प्रयोग किए गए। पहले एसएसपी सिस्टम लागू किया, फिर डीआईजी को पूरे जिले का जिम्मा सौंपा गया। शहर को पूर्व और पश्चिम में अलग कर दो एसपी भी पदस्थ कर दिए। इसके बावजूद लगातार चोरियां हो रही हैं।

पुलिस ने इंदौर जोन में गिरफ्तार हुए 10 लाख अपराधियों का डिजिटल डाटा तैयार किया है, लेकिन यह सिर्फ बड़े अधिकारियों के पास है। निचले स्तर के बीट अधिकारियों के पास कोई जानकारी नहीं है। इस कारण डाटा से जानकारी नहीं निकल रही है।

वर्ष 2015 का ब्योरा

जिला चोरी खुलासा बरामदगी
इंदौर 1315 16% 10%

धार 779 21% 25%

खरगोन 391 28% 29%

खंडवा 339 27% 21%

बुरहानपुर 114 60% 59%

बड़वानी 191 36% 28%

झाबुआ 133 70% 30%

चोरी की घटनाओं का ज्यादा से ज्यादा खुलासा करने के लिए क्राइम ब्रांच को टास्क दिया जाएगा। स्थानीय पुलिस गिरफ्तार चोरों के जेल से छूटने के बाद उनकी मॉनीटरिंग नहीं करती। इसके कारण ऐसा होता है। दोनों एसपी व थानों को निर्देश दिए जाएंगे कि इसके लिए विशेष अभियान चलाएं। -विपिन माहेश्वरी, एडीजी

बाहरी गैंग सक्रिय, फिर भी घेराबंदी नहीं
इंदौर पुलिस पूरी तरह से मोबाइल इन्वेस्टिगेशन पर निर्भर है। जिन वारदातों में मोबाइल चोरी नहीं जाता, उनका खुलासा नहीं हो पाता। एक करोड़ रुपए की सबसे बड़ी चोरी अशर्फीलाल ज्वेलर्स के यहां हुई। इसके अलावा महाकोष हाउस से 25 लाख रुपए चोरी गए। ऐसी कई बड़ी वारदातें हैं, जिनका खुलासा करने में पुलिस नाकाम रही। पुलिस ज्यादातर उन घटनाओं का खुलासा कर पाती है, जिनमें किसी की हत्या हो जाए। पूर्व में हुई बड़ी चोरियों के पीछे ज्यादातर धार, झाबुआ, टांडा, देवास के कंजर गिरोह व आदिवासी गिरोह की संलिप्तता रही है।

खबरें और भी हैं...