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समय गया है कि पर्दे के जीवन को असली जिंदगी में बदला जाए
वह मेगाफोन उठाता है और अपने कर्मचारियों से कहता है कि अगर तुम लोग जाति और धर्म में विश्वास करते हो तो काम पर आने की जरूरत नहीं है। फिर उसने बेहद राजनीतिक अंदाज में एक बात और कही कि मैं उन लोगों को नहीं चाहता जो जाति या धर्म में भरोसा रखते हैं वे काम पर आए। इनके बजाय वे आएं जिनके खून में भारतीयता बहती हो, सिर्फ वहीं सकते हैं जो खुद को सबसे पहले भारतीय मानते हों।
मैं इसके बाद का दृश्य नहीं देख पाया क्योंकि जनता खड़ी हो गई और तालियां बजाने लगी। अचानक से हॉल की शांति खत्म हो गई। इस दौरान वह दृश्य आगे बढ़ गया।
बाद में मुझे बताया गया कि उस समय क्या हुआ था जब 64 साल के रजनीकांत ने परदे पर यह संवाद बोला था। थियेटर में ही नहीं पूरे देश में उनके प्रशंसक ऐसे ही खुशी से झूम उठते हैं जब वे कुछ बोलते हैं।
रजनीकांत, सोनाक्षी सिन्हा और अनुष्का शेट्टी अभिनीत फिल्म लिंगा में फिर से प्रमाणित हो गया है कि फिल्म इंडस्ट्री का राजा (रजनीकांत) वापस गया है अपने सिंहासन पर। हालांकि 2011 में जब वे बीमार पड़े थे तब उनके प्रशंसक बेहद निराश हो गए थे।
रजनीकांत की प्रसिद्धि को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उनकी फिल्मों के लिए जो पागलपन लोगों में दिखता है वह किसी भी फिल्मस्टार के लिए नहीं दिखता चाहे वे कितना भी पैसा लगाकर क्यों फिल्म बनाएं।
हॉलीवुड की ट्रैकिंग एजेंसी रेनट्रैक के अनुसार रजनीकांत के जन्मदिन के मौके पर 12 दिसंबर को रिलीज हुई फिल्म लिंगा ने अमेरिकी बॉक्स ऑफिस पर हंगर गेम्स-2 पिछाड़ दिया है। हंगर गेम्स 1583 स्क्रीन पर लगी थी, उसने पहले दिन सभी स्क्रीनों से 1.19 करोड़ रु. कमाए। जबकि लिंगा ने 91 स्क्रीन से 1.29 करोड़ रुपए कमाए हैं।
वहीं हजारों मील दूर गुवाहाटी के सोनितपुर के बाम गांव सब-डिवीजनल कोर्ट बिश्वनाथ चरियाली में 64 वर्षीय वकील कुमुद बरुआ वह कर गए जो उनकी सीमाओं से आगे बढ़कर था। उन्होंने बिश्वनाथ चरियाली में पिछले दो सालों में सैकड़ों पौधरोपण कर चुके हैं। लेकिन उनका काम लोगों तक नहीं पहुंचा।
उनका पेड़ों और स्वच्छ प्रकृति के लिए प्रेम काफी पुराना है। उन्होंने साफ-सफाई का अभियान तब शुरू किया था जब किसी ने स्वच्छ भारत या सेउज असम (ग्रीन असम) का नाम तक नहीं सुना था। उन्होंने अब तक करीब 550 पौधे लगाए होंगे। वे रोज सुबह अदालत जाने से पहले झाड़ू उठाकर कस्बे की सफाई