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बाजीराव पेशवा और मराठा नायकों पर शोध पढ़ेंगे इतिहासकार

5 वर्ष पहले
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सांस्कृतिक राष्ट्र निर्माण में मराठों की क्या भूमिका रही। इस पर 16-17 फरवरी को देशभर से आए इतिहास के जानकार खुले मंच से अपनी बात रखेंगे। इतिहास को जानने-समझने का यह मौका उच्च शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में डिग्री कॉलेज द्वारा कराई जा रही राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में मिलेगा। मराठों की सांस्कृतिक राष्ट्र निर्माण में भूमिका विषय पर संगोष्ठी होगी। इसे लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। संगोष्ठी का उद्घाटन 16 फरवरी को सत्र डिग्री कॉलेज में होगा। इसी दिन दोपहर बाद के शोधपत्र पेशवा बाजीराव के समाधि स्थल रावेरखेड़ी में पढ़े जाएंगे। संगोष्ठी का तीसरा, चौथा सत्र व समापन डिग्री कॉलेज में दूसरे दिन 17 फरवरी को होगा। कार्यक्रम संरक्षक प्रभारी प्राचार्य डॉ. केआर कुमेकर, समन्वयक इतिहास विभाग के डॉ. मणिशंकर डोंगरे ने बताया संगोष्ठी में देशभर के इतिहासकार अपने शोध पत्र लेकर आएंगे।

इन विषयों पर होगी संगोष्ठी
शिवाजी द्वारा हिंदू पद पादशाही की स्थापना।

मराठाकालीन समाज में खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा-अाभूषण, उत्सव, त्योहार व मनोरंजन के साधन।

मराठाकाल में महिलाओं की सांस्कृतिक राष्ट्र निर्माण में भूमिका।

मराठाकालीन साहित्य का सृजन, साहित्यकारों का संरक्षण व इतिहास लेखन।

पेशवाओं की सांस्कृतिक राष्ट्र निर्माण में भूमिका, मराठाकालीन वास्तु व स्थापत्य कला।

सांस्कृतिक राष्ट्र निर्माण में अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका।

सिंधिया, गायकवाड़, पंवार व भोंसले का योगदान।

मराठों का धार्मिक स्थलों के निर्माण व पुनर्निर्माण में योगदान।

मराठाकालीन संगीत, नृत्य, गायन-वादन, चित्रकला, व्यापार, कृ़षि, वाणिज्य, उद्योग व मुद्रा।

मराठों का राजपूतों से संबंध।

मराठाकालीन सरदारों व ठिकानेदारों का योगदान।

मराठा और मुगल, पेशवा बाजीराव-मस्तानी का एेतिहासिक तथ्य।

यह है संगोष्ठी का उद्देश्य
आयोजन सचिव डॉ. सेवंती डावर, समिति सदस्य प्रो. आईएस पंवार, आशा जैन, बीएस सेनानी, सुखदेव मुकाती, नीरज करारी, प्रवीर पांडेय, केके बैसवार, एलएल पगारे व दीपकसिंह परिहार ने बताया भारत की सांस्कृतिक राष्ट्र निर्माण में मराठों की भूमिका को भारतीय इतिहास में निष्पक्ष व न्यायपूर्ण ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया है। मराठों की भूमिका को इतिहास में उपयुक्त स्थान मिले। आज की पीढ़ी इन बातों से अवगत हो इसी उद्देश्य को लेकर यह संगोष्ठी रखी गई है। शोधपत्र प्रस्तुत करने वालों को रेल या बस का टिकट देने पर किराया भुगतान किया जाएगा।

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