- Hindi News
- सिविल अस्पताल की दाई अब बडूद गांव की सरपंच
सिविल अस्पताल की दाई अब बडूद गांव की सरपंच
सरपंच बनी फिर भी नहीं छोड़ा अपना पुराना काम, बाेलीं दाई का काम पहले सरपंची बाद में
रईससिद्दीकी|सनावद
सिविलअस्पताल सनावद में सालों से दाई के रूप में काम कर रही ग्राम बडूद की श्यामाबाई हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में बडूद से सरपंच चुनी गई हैं। सरपंच पद के लिए गांव से श्यामाबाई सहित 10 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन सबसे ज्यादा वोट श्यामाबाई को (1841) मिले। वह दूसरे प्रत्याशियों से 485 वोट ज्यादा लाई।
शहर से करीब 8 किमी दूर ग्राम पंचायत बडूद की सरपंच बनने के बाद भी श्यामाबाई सिविल अस्पताल में पहले की तरह नियमित रूप से रही हैं। वह यहां आज भी गांव की गर्भवती महिलाओं के लिए दाई का काम कर रही हैं। अस्पताल से उन्हें इसके लिए किसी प्रकार का वेतन नहीं मिलता। 18 साल पहले सनावद-बड़वाह में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही एक महीने की ट्रेनिंग दी गई थी। जिसके आधार पर वह यह काम करती हैं।
पति लकवाग्रस्त, बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाली
श्यामाबाईके पति कुंवरजी पंचोली को करीब डेढ़ साल पहले लकवा लग गया। इससे पहले वह सनावद स्थित सूत मिल में काम करते थे, लेकिन बीच में मिल बंद हो गई थी, तब उनका कामकाज भी छूट गया था। सारी जिम्मेदारी श्यामाबाई ने भी पूरी तरह से निभाई। उनके चार बच्चे हैं। एक बीमा एजेंट और दो मिस्त्री ठेकेदारी का काम करते हैं। जबकि एक बेटी की शादी हो गई।
अब तक करा चुकी हैं 6 हजार से ज्यादा डिलेवरी
करीब18 साल से दाई का काम कर रही श्यामाबाई अब तक गांव की महिलाओं की छह हजार डिलेवरी करा चुकी हैं। इसके ऐवज में खुश होकर लोग उन्हें 100-500 रुपए तक देते हैं। अब सरपंच बनने के बाद भी वह यह काम छोड़ना नहीं चाहती। उनका कहना है सरपंच बाद में पहले मेरा काम है लोगों की सेवा करना।
हरिजन महिला सीट होने का फायदा मिला
श्यामाबाईने बताया इस बार ग्राम पंचायत सीट हरिजन महिला हो गई। इस कारण भाग्य आजमाने के लिए मैंने फार्म भरा। सालों से सिविल अस्पताल में दाई का काम करने के कारण लोगों में पहले से ही पहचान बनी हुई थी। चुनाव में यूं तो नौ अन्य प्रत्याशी भी खड़े थे, लेकिन मतदाताओं ने मुझे ही चुना। इसीलिए सरपंच बनने के बाद भी अपना पुराना काम छोड़ना नहीं चाहती।
श्यामाबाई आज भी सिविल अस्पताल में दाई का काम कर रही है।