बाल अतिथियों का टीका लगाकर सम्मान किया
शास्त्रोंके अनुसार श्राद्ध पक्ष की पंचमी तिथि पर बच्चों का श्राद्ध किया गया। इस दौरान लोगों ने बच्चों को आमंत्रित कर खीर-दूध पिलाया और फलदान सहित अन्य वस्तुएं भेंट की। ब्राहम्णपुरी निवासी श्रीमती दिप्ती परसाई, संगीता जोशी ने बताया बदलते समय में जिन वस्तुओं को देखकर बच्चे खुश हुए वह चीजें उन्हें दी गई। बच्चों को बिस्किट, चॉकलेट जैसी वस्तुएं भी बांटी गई।
श्राद्ध पक्ष में यह आएंगी तिथियां
{सुहाग नवमी 17 सितंबर
{ सन्यासी श्राद्ध 20 सितंबर
{ शस्त्रादिहताना श्राद्ध 21 सितंबर
पंचमी तिथि पर बाल अतिथियों को किया आमंत्रित, लगाया टीका।
सर्वपितृ अमावस्या 23 को
पंडितों के अनुसार सौभाग्यवती स्त्री की मृत्यु के बाद उसका श्राद्ध नवमीं तिथि को, सन्यासियों का द्वादशी को, जिन लोगों की मृत्यु किसी अस्त्र-शस्त्र से होती है उनका श्राद्ध त्रयोदशी को तथा सभी पूर्वजों का श्राद्ध 23 सितंबर अमावस्या को किया जाता है। पंडित निशांत परसाई ने बताया श्राद्ध पक्ष में अतिथि भोज एवं प्रतिदिन तर्पण करने का विशेष महत्व है।