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संतों का सानिध्य पा संतमय हो गया सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट, प्रतिबिंब देखकर पूजा-अर्चना की

7 वर्ष पहले
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रविवारको सिद्धवरकूट में दो दिनी सर्वतोभद्र महामहोत्सव (वेदी प्रतिष्ठा) की शुरुआत हुई। सुबह 6.15 बजे मंगल वाद्य घोष, सुप्रभात स्त्रोत, मंगलाष्टक, अभिषेक, शांति धारा के साथ मंदिर में भक्तों का आगमन जारी रहा।

श्रमणाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज ससंघ 20 संतों के साथ सुबह 8.30 बजे सिद्धवरकूट पहुंचे। इन्द्र प्रतिष्ठा, मंगल कलश स्थापना, ध्वजारोहण, सौभाग्यवती घटयात्रा का आयोजन हुआ। अष्टकुमारी अखंड सौभाग्यवती महिलाओं ने मंदिर शुद्धि वेदी शुद्धि का कार्य किया। 108 इन्द्रों द्वारा याग मंडल विधान के बाद श्रमणाचार्यजी के मंगल प्रवचन हुए। रात में विपिन जैन एंड पार्टी बुरहानपुर ने भजन संध्या प्रस्तुति की। सोमवार को यहां मूलनायक श्री संभवनाथजी की वेदी सहित सप्त वेदियोें की वेदी प्रतिष्ठा होगी। रविवार से सिद्धक्षेत्र का प्रवेश द्वार दक्षिण मुख से पूर्व की ओर हो गया। मंदिर शुद्धि का काम सौभाग्यवती महिलाओं ने किया। इस दौरान डॉ. जयकुमार जैन उपाध्ये संस्कृत विद्यापीठ दिल्ली ने धार्मिक विधि से पूजा कराई। महिलाओं ने खुद का प्रतिबिंब देखकर पूजा की।

कलश यात्रा के बाद जैन समाज की महिलाओं ने मंदिर की परिक्रमा की।

आज यह होगा

{सुबह6.15 बजे से 8.15 बजे तक मंगल वाद्य घोष, बांसुरी वादन, मंगलाष्ठक, शांतिधारा, अनुष्ठान, प्राण प्रतिष्ठा, विशुद्धसागरजी महाराज के प्रवचन होंगे।

{सौभाग्यवती दंपती द्वारा विश्व शांति महायज्ञ, 11.35 से 11.55 बजे तक जिनबिम्ब प्रतिष्ठा समारोह, 108 कलश से अभिषेक होगा। साथ ही अन्य कार्य भी होगे।

यह संत आए

विशुद्धसागरजी

सुप्रभसागरजी

अप्रमितसागरजी

अराध्य सागर

सुव्रतसागरजी

सुयशसागरजी

अरिजितसागरजी

अनुपमसागरजी