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नवजात को अपनाया तो समाज क्या कहेगा शिशु गृह भेज दिया तो बोलेंगे कैसी है ये मां

7 वर्ष पहले
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एकसप्ताह से जिला अस्पताल में भर्ती दुष्कर्म पीड़ित नि:शक्त युवती और उसके नवजात की शुक्रवार शाम छुट्टी हो गई है। जिंदगी का दोहरा दर्द झेल रही युवती और परिजनों ने कहा समाज से लड़े या नवजात की जिम्मेदारी निभाएं। नवजात को अपनाया तो समाज क्या कहेगा। और यदि उसे शिशु गृह में भेजा तो समाज फिर कहेगा कैसी है मां। अफसरों ने युवती परिजनों की जरूरी काउंसलिंग की।

नवजात को लेकर एक सप्ताह से परेशान परिजन शुक्रवार रात 8.15 बजे घर रवाना हुए। दोपहर में युवती और शाम को नवजात की छुट्टी हो गई थी। नियमानुसार एमएलसी केस में छुट्टी के पहले पुलिस को सूचना देना अनिवार्य है। परिजनों ने पुलिस को शाम को सूचना दी। इसके बाद दोेनों को डिस्चार्ज किया। मजदूर परिजनों का कहना है अस्पताल रोजाना करीब 200 रुपए खर्चा होता था। उधार लेकर दिन काटे। गांव जाएंगे तो समाज के ताने और दुश्वारियां मिलेंगी। परिजनों का कहना है दो दिन पहले अफसरों ने काउंसलिंग तो कर ली, लेकिन समाज की हकीकत जानना भी जरूरी है। मामले में एक साल से अधिक समय तक आरोपी मोहिसन कल्लू (24) निवासी बलकवाड़ा ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। पीड़ित गर्भवती हो गई। नवजात के जन्म के बाद आरोपी को जेल भेजा गया।

अपनाते हैं तो िमलेगी सहायता

यदिपरिजन नवजात को अपनाते हैं तो फॉस्टर केयर में परिजन को दो से तीन साल तक प्रतिमाह दो हजार रुपए की सहायता मिलेगी। इसके बाद परिजनों को नवजात का पालन करना होगा। महिला सशक्तिकरण विभाग युवती को रोजगार के लिए प्रशिक्षण देगी। परिजन नवजात को नहीं अपनाते हैं तो बाल कल्याण समिति इंदौर निर्णय करेगी।

नवजात को रायपुर से लेने आए

नवजातको लेने के लिए गुरुवार रायपुर के एक व्यक्ति जिला अस्पताल पहुंचा। उन्होंने एसएनसीयू में नवजात को देखा। इसके बाद परिजनों से मिले। गोद लेने में कानूनी प्रक्रिया पूरी करना होती है।

युवती परिजनों को फिर समझाएंगे

^युवती परिजनों की फिर से काउंसलिंग करेंगे। एेसे मामलों में मजबूती से खड़ा रहकर समाज का मुकाबला करना चाहिए। किसी किसी को तो आगे आना होगा। यदि परिजन नहीं चाहते हैं तो उसका भी निराकरण करेंगे।^ -भारतीअवास्या, महिलासशक्तिकरण अधिकारी खरगोन