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ग्राहकों को सादे कागज पर बनाकर दे रहे बिल
त्योहारोंके इस सीजन में बाजारों में चहल-पहल नजर आने लगी है। सभी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं की बिक्री रोजाना हो रही है। इनके लिए बाजार में बड़ी-बड़ी दुकानें संचालित है। लेकिन इन दुकानों से आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं आयकर का खुला उल्लंघन हो रहा है। शहर की अधिकतर दुकानों पर ग्राहकों द्वारा सामान खरीदने पर दुकानदार पक्के बिल नहीं दे रहे हैं। शहर में किराना, हार्डवेयर, जनरल स्टोर्स, सराफा, लोहा, सीमेंट कपड़ा दुकानें संचालित हो रही है। इन सभी दुकानों पर रोजाना लाखों रुपए का व्यापार होता है। लेकिन दुकानदार द्वारा पक्का बिल नहीं दिया जाता। मात्र कागज की सफेद पर्ची पर हिसाब लगाकर ग्राहक से क्रय की राशि वसूल ली जाती है। हालांकि व्यापारी ग्राहक से सभी प्रकार के टैक्स वैट, सेल्स टैक्स की राशि वसूल कर रहे हैं। लेकिन ग्राहक को पक्का बिल ना देकर टैक्स की राशि हड़पकर आयकर विभाग को लाखों रुपए की चपत लगाई जा रही है। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी कोई कार्रवाई नहीं करते।
जेब में जा रहा टैक्स
मूल्य स्टॉक सूची भी गायब
कुछ व्यापारियोंं ने तो विभागीय कार्रवाई से बचने का आसान तरीका निकाल लिया है। जब कभी आयकर विभाग के अधिकारियों का दल जांच के लिए शहर आता है तो व्यापारी दुकानों की शटर गिराकर इधर-उधर हो जाते है। वहीं दुकानों पर स्टॉक और मूल्य सूची भी लगाना बंद कर दिया है।
विभागको सूचित किया जाएगा
^सैलटैक्स विभाग को राजस्व की चोरी करने वाले व्यापारियों के संबंध में सूचित किया जाएगा। विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।^ -प्रियंकामिमरोठ, नायबतहसीलदार सनावद
व्यापारियोंं द्वारा ग्राहकों को पक्का बिल देकर सरकार का पूरा टैक्स उनकी जेब में चला जाता है। ग्राहक से टैक्स वसूल लिया जाता है, लेकिन पक्का बिल ना देकर टैक्स को सरकारी खजाने में पहुंचाने के बजाय व्यापारी स्वयं ही हजम कर रहे हैं। लोहा और सीमेंट का कारोबार पूरी तरह सादी पर्ची पर किया जा रहा है। लोहे के कारोबारियों द्वारा विक्रय कर और आयकर से बचने के लिए ग्राहक को बिल देना तो दूर एस्टीमेट पर भी कुछ लिखकर देने से परहेज किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र से खरीदारी करने आए ग्राहक राकेश रेवापाटी, राजेंद्र पंवार, मोहसीन खान ने बताया सामग्री खरीदने पर कभी भी दुकानदार ने पक्का बिल बना कर नहीं दिया। सफेद पर्ची पर राशि लिखकर रकम ली जाती है।