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डिग्रियों से पेट नहीं भरता, शराब बेचकर खुद के लिए कमाता हूं
...और इधर बेटेपढ़ने में होशियार, मैं सक्षम नहीं मदद चाहिए ; पिता ने लगाई प्रशासन से गुहार
मैंदेख नहीं सकता, घर में सिर्फ बूढ़ी मां है। उसकी उम्र भी 80 साल है। चलने में असमर्थ है। मैं 12वीं पास हूं। 2011 में संविदा परीक्षा भी उत्तीर्ण की, टेलीफोन ऑपरेटर का डिप्लोमा भी है। बावजूद इसके रोजगार नहीं है। मां और खुद का पेट भरने के लिए शराब बेचता हूं। मंगलवार को यह बात पिपल्या खुर्द के रमेश सिटोले ने कही। रमेश ने बताया कई बार आवेदन दिए। लेकिन शारीरिक कमजोरी के कारण कोई नौकरी नहीं देता। डिग्री है, पर काम की नहीं। शराब बेचना मजबूरी है।
कद बाधा है
पिताने कहा- बौना कद होने से बच्चों को सब चिढ़ाते हैं। लोगों के बीच जाने में झिझक भी रहती है। पढ़ लिख जाएंगे तो अच्छा मकाम मिल जाएगा। अफसरों ने मदद का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों का विरोध, पर कोई चारा नहीं
रमेशने बताया शराब कारोबार का विरोध ग्रामीण करते हैं, लेकिन आजीविका चलाने कर दूसरा रास्ता नहीं है। जिला पंचायत सीईओ नरेंद्र सूर्यवंशी ने आश्वसत किया है कि रमेश की हर संभव मदद करेंगे।
पिपल्याखुर्द के दृष्टिहीन रमेश सिटोले ने अफसरों को बताई समस्या।
मदद की आस में पिता लोभीराम के साथ आए नितेश लोमेश।
बेबसी