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बीमारी समझ में नहीं आई, उखाड़ लाए मिर्च के पौधे

7 वर्ष पहले
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इसलिए आई बीमारी

भगवानपुरा क्षेत्र के किसानों को मिर्च की फसल पर आई बीमारी समझ में नहीं आई तो वह शनिवार पौधे उखाड़कर कीटनाशक दुकान पर ले आए। किसानों ने बताया बीमारी का नाम नहीं जानते। पहले भी गलत दवाई ले गए थे। फसलों का सही ट्रीटमेंट नहीं हुआ और कीटनाशक पर फिजूल खर्च हो गया। अबकी बार पौधा दुकानदार को बताया है। उसने सही दवाई दी है।

भगवानपुरा क्षेत्र के ग्राम रूपगढ़ का किसान गबरसिंह पिपलझोपा का तुलसीराम करीब 15 किसानों के साथ शनिवार दोपहर 1 बजे बिस्टान रोड तिराहे की एक कीटनाशक दुकान पर आए। वह मिर्च के पौधे भी लाए थे जो मुर्झाए हुए थे। गबरसिंह तुलसीराम ने बताया बीमारी के बारे में वह नहीं जानते। कीटनाशक दुकान के संचालक प्रशांत पटेल ने बताया पौधों पर थ्रीप, वायरस मकड़ी का अटैक है। थ्रीप का असर सबसे ज्यादा है। इस बीमारी में पौधे की पत्तियों की मुख्य ब्रांच पर कीट का अटैक सबसे पहले होता है। पौधे मुरझाने लगते हैं और फसलों की ग्रोथ रुक जाती है। इन बीमारियों को लेकर रोजाना 15-20 किसान रहे हैं।

{ मिर्च की फसल में नमी के लिए बारिश नहीं होेने पर सिंचाई करते रहे। { कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर कीटनाशक का छिड़काव करें। { ग्राेथ पर नजर रखें और उत्पादन लेने के लिए ट्रीटमेंट करते रहे।

यह करें किसान

किसानों ने मिर्च के पौधे उखाड़कर कीटनाशक दुकान संचालक को बताया।

जानकारी के अनुसार थ्रीप, मकड़ी और वायरस का अटैक गर्मी की वजह से बढ़ा है। मौसम में आए उतार-चढ़ाव के कारण यह बीमारियां फैली हैं। बारिश होने की स्थिति भी बदली है। यदि बारिश फुहारों से शुरू होकर तेज हो जाए तो फसलों में यह बीमारी नहीं होती, लेकिन अगस्त-सितंबर में हुई बारिश तेज शुरू हुई और फुहारों पर खत्म हुई है।

किसानों ने कहा- फसलों का सही ट्रीटमेंट हो इसलिए पहुंचे दुकानदार के पास

तरकीब