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हमें अपने अस्तित्व के लिए मजबूत होना होगा नहीं तो प्रशासन हमारी उपेक्षा करता रहेगा

7 वर्ष पहले
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जब तक हम एकजुट होकर सामूहिक ताकत से लोककला, संस्कृृति, साहित्य के अस्तित्व के लिए नहीं लड़ेंगे तब तक शासन-प्रशासन हमारी उपेक्षा करता रहेगा। प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित निमाड़ उत्सव में भी हमारी उपेक्षा की जाती है। निमाड़ महासंघ ने हमारे मान-सम्मान का जो बीड़ा उठाया है उसकी मजबूती को बढ़ाकर हमारा अपना एक मंच तैयार करना होगा। इस मंच के तहत 11 अक्टूबर को दो दिवसीय निमाड़ लोक महोत्सव आयोजित करेंगे। यह विचार शनिवार को निमाड़ महासंघ द्वारा गायत्री मंदिर में आयोजित चिंतन बैठक में निमाड़ी लोक कलाकारों ने रखे। बैठक में कलगी तुर्रा के लोक गीतकार सुमेरसिंह सुमन, शिवराम कुशवाह, यशवंत यादव, रुपचंद जपाले, साहित्यकार कुंवर उदयसिंह अनुज, कृष्णपालसिंह, काठी नृत्य के देवराम अबोले, कबीर वाणी के बरसिंह भूरिया, फुलचंद भावर, गम्मत के चंद्रकांत सेन मौजूद थे। महासंघ के प्रमुख संजय रोकड़े ने लोक कलाकारों के मान-सम्मान को बरकरार रखने के लिए संघर्ष करने एकजुट रहने का आह्वान किया। संचालन कृष्णकांत ने किया। आभार महासंघ के जिला प्रभारी शैलेंद्र जांगड़े ने माना।

बैठक में उपस्थित निमाड़ के कलाकार।