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सरकारी स्कूलों में सुविधाआें का अभाव

7 वर्ष पहले
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बड़वाहब्लॉक के अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों की कमी तो है ही, स्कूल भवन भी इतने छोटे हैं कि बच्चे ठीक ढंग से बैठ नहीं पाते। आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र और फस्ट एड बॉक्स भी नहीं है। जिसके चलते स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण के दौरान इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। गौरतलब है शिक्षा विभाग शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी जिम्मेदारों की लापरवाही से अभी भी विद्यार्थियों की परेशानी कम नहीं हो रही है।

ब्लॉक में 142 मिडिल 426 प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से अधिकतर स्कूलों में तो अग्निशमन यंत्र है, ही फस्ट एड बॉक्स। नियमानुसार सभी सरकारी प्राइवेट स्कूलों में प्राथमिक उपचार की किट दवाइयां होना अनिवार्य है। स्कूल में आगजनी की घटना होने की स्थिति में इस पर काबू पाने के लिए अग्निशमन यंत्र भी नहीं है।

निर्देशके बाद भी नहीं लगी शिकायत पेटी - सरकारीप्राइवेट स्कूलों में बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित होने से बचाने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने शिकायत पेटी लगाने का निर्देश दिए थे। इनमें विद्यार्थी पालक शिक्षकों की शिकायत का आवेदन डाल सकते हैं। शिक्षा विभाग के इस निर्देश को एक साल पूरा होने को है। लेकिन ब्लॉक की स्कूलों में शिकायत पेटी नहीं लगी है। वहीं विभाग द्वारा खोया-पाया बॉक्स लगाने के भी निर्देश दिए थे। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए हाथ धोने के लिए स्टैंड भी नहीं बने हैं। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारी से बात की तो उन्होंने कहा स्कूलों को निर्देश दिए जाएंगे।

स्कूलोंकी दयनीय हालत - छतसे उखड़ता प्लास्टर। एक ही कक्ष में बैठे बच्चे। ग्रामीण क्षेत्रों की प्राइमरी मिडिल स्कूलों में ऐसे नजारे आम बात है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलें तो बनी है लेकिन पढ़ने वाले बच्चों की संख्या न्यूनतम है। ऐसी कई सरकारी स्कूलें है जिनमें आज तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। अतिथि शिक्षकों के भरोसे इन स्कूलों को चलाया जा रहा है।