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ढकलगांव के किसान खुद बनाने लगे 2 किमी जर्जर सड़क
नरहो निराश करो मन को, कुछ काम करो-कुछ काम करो और जग में रह कर नाम करो। मैथिलीशरण गुप्त की यह पंक्तियां खरगोन जिले के ढकलगांव पंचायत के किसानों पर खूब जंचती हैं। यहां के किसानों ने दो साल पहले गांव की नदी पर रपटा बनाया था। इस बार दो किमी जर्जर मार्ग की मरम्मत करने जा रहे हैं। गांव से खेत को जाने वाले 2 किमी मार्ग 2-3 साल से जर्जर है। उपज लाने में बड़ी मुश्किल होती थी। सरपंच-सचिव से शिकायत की। ध्यान नहीं दिया गया। किसानों के मन में निराशा नहीं आई। खुद काम करने की ठानी। हर घर से 300-300 रुपए चंदा एकत्रित किया। चार ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन से मुरम उठाकर लाए। मंगलवार से खुद ही काम करना शुरू कर दिया। पहले दिन 25-30 किसानों ने श्रमदान किया।
गांव के किसान गोपाल चौधरी ने बताया सरपंच रमेश पोपड़िया और सचिव देवेंद्र सोनी को खराब राेड की कई बार शिकायत कर चुके थे। पंचायत द्वारा हमेशा पैसा नहीं होने की बात कही जाती रही। बारिश में रोड बहुत खराब हो गया। यहां के करीब 30 किसान के खेत आते हैं। यहां से टोकलाय, गवल मार्ग भी होकर गुजरता है। सुनवाई नहीं होने पर हमने गांव के हर घर से 300-300 रुपए जमा किए। 15 हजार रुपए की राशि जमा होने पर काम शुरू करा दिया।
पंचायत के पास नहीं है पैसा
^ पंचायत ने तीन-चार साल पहले रोड बनवाया था। फिलहाल पंचायत को पैसा नहीं मिलने के कारण परेशानी रही है। ग्रामीणों ने दो दिन पहले ही यह बात बताई थी।^-देवेंद्र सोनी,सचिव, ग्रामपंचायत, ढकलगांव
चंदा जमा कर पहले बना चुके हैं रपटा
किसानोंने बताया दो साल पहले गांव की नदी से निकलने वाले मार्ग पर हमने खुद ही चंदा कर रपटा बनाया था। ताकि वाहन चालक और महिलाएं आसानी से निकल सकें। तब भी पंचायत के सरपंच-सचिव ने शर्म महसूस नहीं की। तब 100-100 रुपए चंदा किया गया था।
गांवके ये किसान जुटे
लखनपिता नत्थू, कमलचंद भाईराम, महावीर गेंदालाल, भैयालाल मोहन, दूलीचंद केशव, दिनेश मिश्रीलाल, लवकुश रामलाल, रामरतन रेवाराम, देवराम गणपत, दशरथ परसराम, हरिकरण दगड़ू सहित अन्य लोग श्रमदान कर रोड़ दुरुस्त करने में जुट गए।
ढकलगांव के किसान रोड बनाने के लिए श्रमदान करते हुए।