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डबल स्टोरी बन रहा सिविल अस्पताल

7 वर्ष पहले
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सिविलअस्पताल भवन कुछ महीनों में डबल स्टोरी हो जाएगा। इसका काम दो महीने पहले शुरू हो गया है। जो सुविधाएं नीचे है वह सब दूसरी मंजिल पर भी उपलब्ध होगी। यहां पैथालॉजी, मरीजों के कमरे, लैब, ओटी सहित अन्य सुविधाएं होगी। यह काम जनभागीदारी से कराया जा रहा है। सिविल अस्पताल शहर की 50 हजार की आबादी के अलावा आसपास के ग्रामीणों को शामिल कर करीब 2 लाख से ज्यादा मरीजों के लिए एक वरदान है। इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायल दो जिले (खंडवा-खरगोन) के लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए यहीं लाया जाता है।

रोगी कल्याण समिति की साधारण सभा 27 दिसंबर 11 को एक ठहराव प्रस्ताव पारित हुआ। इसमें पश्चिमी हिस्से में प्रथम तल (पहली मंजिल) के निर्माण की स्वीकृति हुई। 6 जुलाई 13 को बैठक में 55 लाख रुपए की लागत से जनभागीदारी से योजना पूर्व दिशा में निर्माण की स्वीकृति मिली। सांख्यिकीय विभाग को प्लान भेजने के बाद करीब 20 लाख रुपए पहले चरण में मंजूर हुए। 10 लाख रुपए दूसरे चरण में मिले। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के माध्यम से तीन महीने पहले निर्माण कार्य शुरू कराया। लोनिवि अफसरों के अनुसार डबल स्टोरी भवन करीब 55 लाख रुपए की लागत से तैयार होगा। इसका काम एक प्राइवेट कंपनी से कराया जा रहा है। फिलहाल यहां कमरों का निर्माण चल रहा है। इसके बाद लैब, ओटी और दूसरे कार्यों की शुरुआत होगी।

सिविल अस्पताल का निर्माण कार्य जारी है।

यह होगा फायदा

>अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। यह कमी तो दूर नहीं हो पाई है, लेकिन वार्ड बढ़ने से मरीजों को होने वाली फजीहत दूर होगी।

> प्रसूताओं को वार्ड में जगह नहीं मिलने के कारण बरामदे में ही शिफ्ट कर दिया जाता है। इस परेशानी से भी निजात मिलेगी।

> प्रसूताओं को 7 दिन में अस्पताल से छुट्‌टी देने का नियम है, लेकिन पलंग कम होने के कारण उन्हें दाे या तीन दिन में छुट्‌टी दे दी जाती है। परंतु अब एेसा नहीं होगा।