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धरती को अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाने रोकना ही पडे़गा कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बनडाइ आक्साईड का उत्सर्जन

7 वर्ष पहले
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धरतीको बचाने एवं मानव जाति को भौगोलिक खतरों से अवगत कराने के उद्देश्य से मंगलवार को जीडीसी में अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस मनाया गया। कार्यक्रम आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के निर्देशन में हुआ। इसका लक्ष्य पृथ्वी को गर्म होने तथा सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरणों से बचाने पर केन्द्रित था। जवाहरलाल नेहरू सूतमिल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एनआर भारती ने विद्यार्थियों को संबंधित करते हुए कहा- यदि अल्ट्रा वायलेट किरणों से धरती को बचाना है तो कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बनडाइ आक्साइड के उत्सर्जन को रोकना होगा। संचालन डॉ.आर.के.यादव, डॉ.रंजीता पाटीदार ने किया। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ प्रो.मनोज पाटीदार, प्राध्यापक डॉ. जी.एस.चौहान, प्रो.एस.एस.ठाकुर, प्राध्यापक डॉ.एस.एच.जाफरी, डॉ.रंजीता पाटीदार, प्रो.ममता गोयल, प्रो.मनीषा चौहान, प्रो.उमेश कुमार चरपे, प्रो.एस.के.मालीवाड़ उपस्थित थे।

पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें बरकरार रखनी होगी हवन पद्धति

श्रीभारती ने कहा पर्यावरण को प्रदूषण से रोकने के लिए लोगों को सायकल चलाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए हवन पद्धति को बरकरार रख वायु को प्रदूषण से बचाया जा सकता है। धरती को बचाने के लिए पौधों का लगाना आवश्यक है। प्राचार्य एम.के.गोखले ने बताया मीथेन एवं कार्बन डाईआक्साइड आदि के कारण ओजोन परत को नुकसान हो रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थी।