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राष्ट्रभाषा को बनाए रखने के लिए आंचलिक बोलियों का मोह छोड़ दें

7 वर्ष पहले
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{ हिन्दी दिवस पर कार्यक्रम सम्पन्न

भास्करसंवाददाता|महेश्वर

राष्ट्रभाषाहिन्दी का गौरव अक्षुण्ण बनाए रखना है तो हमें आंचलिक बोलियों को भाषा बनाने का मोह छोड़ना होगा। यह विचार संस्कृत विद्वान नारायण प्रसाद मंडलोई ने ’चिंतन’ संस्था द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही। व्याख्याता आरके शर्मा ने संचालन करते हुए हिन्दी भाषा के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी। बाल प्रतिभा शशांक जोशी ने हिन्दी महिमा प्रस्तुत की। बतौर अतिथि िशक्षाविद् पीके गुप्ता, चिंतक केशवदेव आर्य, प्राचार्य अजय घुले, जिला तैराकी संघ अध्यक्ष आशीष मेहता, माहिष्मति संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य पं. पंकज मेहता ने हिन्दी की सैकड़ों वर्ष से जारी विकास यात्रा की विस्तृत विवेचना कर वर्तमान भू मंडलीय चुनौतियों से सामना करने में हिन्दी को सक्षम बताया। कार्यक्रम में राजकुमार शर्मा, नारायण गुप्ता, मनीष मेहता, जाहिद शाह, युनूस अंसारी, ने प्रासंगिक काव्य पाठ किया। इस अवसर पर रंजन दुबे, राजेन्द्र आमगा, वैभव बघेला उपस्थित थे।

कार्यक्रम में संबोधित करते श्री दुबे।