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अनीति करने वाले का अंत सुनिश्चित है

7 वर्ष पहले
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कथा का श्रवण करती महिलाएं। इनसेटपं.अशोक कृष्ण।

भास्कर संवाददाता|बड़वाह

अनीतिकरने वाला कोई कितना बड़ा भी हो जाए उसका अंत सुनिश्चित है। जिस तरह हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को नारायण भक्ति से दूर करने के लिए अग्नि में उसका दहन करना चाहा तब उसकी इस अनीतिपूर्ण कार्य को रोकने के लिए भगवान नारायण ने भगवान नरसिंह अवतार लेकर प्रहलाद को अपनी शरण में लेकर उसकी भक्ति का फल प्रदान किया। वहीं हिरण्यकश्यप का वध कर उसके अहंकार तथा अभिमान का परिणाम दिया। यह बात पं. अशोक कृष्ण महाराज ने कथा के दूसरे दिन कही कथा दिगंबर जैन धर्मशाला में आयोजित की जा रही है।