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मोरटक्का से कोठी होते हुए सनावद आएंगे वाहन

7 वर्ष पहले
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खंडवा-इंदौरसड़क मार्ग शुक्रवार सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक बंद रहेगा। रेलवे द्वारा मोरटक्का स्थित रेलवे क्रासिंग का मेंटेनेंस किया जाना है। इस दौरान लाइट व्हीकल और बाइक का ही आवागमन हो सकेगा। यहां से बड़े वाहन निकालने की अनुमति नहीं रहेगी। इसे लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है। रेलवे ने ट्रैक पर स्लीपर पटरियां बिछाने के लिए सामग्री भी पहुंचा दी है।

गौरतलब है मोरटक्का स्टेशन के पास स्थित मीटरगेज रेलवे फाटक से बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। इसके चलते इसकी पटरियां काफी कमजोर हो चुकी है। इन्हें बदलने का काम किया जाएगा।

125साल पुराना है रेलवे ट्रैक

करीबसवा सौ साल पहले अंग्रेजों ने अपनी सहूलियत के लिए इंदौर-खंडवा रेल मार्ग का निर्माण कराया था। यह मार्ग व्यापारिक दृष्टिकोण से तब भी काफी महत्वपूर्ण था और आज भी है। सेक्शन इंजीनियर एमके रब्बानी ने बताया शुक्रवार को मोरटक्का रेलवे क्रासिंग पर बिछी इन पटरियों को परिवर्तित किया जाएगा। इस दौरान सुबह नौ बजे से शाम के छह बजे तक वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा।

ट्रैक पर यह स्लीपर पटरियां बिछाई जाएगी।

ऐसे डायवर्ट होंगे वाहन

छोटेवाहनों को मोरटक्का से कोठी होते हुए सनावद तक निकाला जाएगा। क्रासिंग से बड़े वाहनों के गुजरने पर पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा।

यह भी जानें कनाडा से आई थी रेल

इंंजीनियरश्री रब्बानी के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन 1875 से 1878 के बीच यहां रेलवे लाइन बिछाई थी। इस मार्ग के लिए एक बहुत बड़ी राशि होल्कर वंश के शासकों ने दी थी। खंडवा से इसका कार्य शुरू हुआ था। पटरी में लगी गार्डराें को रेल कहा जाता है। इन रेलों को अंग्रेजों ने खासतौर पर कनाडा से बनवाकर बुलवाया था। उस समय की यह रेलें काफी मजबूत होने के साथ ठोस है। यही कारण है की इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी इनका घिसाव नहीं ही पाया। किंतु अब इनका रखरखाव काफी खर्चीली हो गया है। लगातार मिट्टी में धंसने से इनमें जंग लगना शुरू हो गया है।