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धुंध में अलसाई सुबह, दोपहर में बादल छाए; रात का तापमान बढ़ा
ओंस जमीन से उगे गेहूं की नरम पत्तियों पर अठखेलियां करती नजर आई। देखकर लगा जैसे हरे लिबाज में चमकीले मोतियों को किसी ने सजाया हो। गेहूं के खेतों पर प्रकृति का यह शृंगार आकर्षित कर रहा था।
धुआं-धुआं-सी घूम रही है मुखरित-सी पुरवाई, नववर्ष के द्वारे मनभावन-सी सर्दी आई। सरस्वती माथुर की यह पंक्तियां उन लोगों को देख याद आई जो कोहरे आैर छाए बादलों के साथ सुबह सनावद रोड पर नजर आए।
गेहूं की दुर्वा पर इठलाई ओंस
धुंध के बीच निकले लोग
सुबह कोहरे धुंध के बाद दिनभर बादल छाए रहे। हालांकि ठंड का असर ज्यादा नहीं था। फिर भी बच्चों की सेहत अच्छी रहे इसलिए वह शाम तक गर्म ऊनी कपड़ों में नजर आए। दिनभर छाए बादल छाए रहे।
गर्म कपड़ों में कैद रहे बच्चे