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विवेकानंद ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यूरोप-अमेरिका में फैलाई संस्कृति
स्वामीविवेकानंद अपने शैक्षिक चिंतन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर भारतीय संस्कृति की ख्याति यूरोप और अमेरिका में फैलाने में सफल हुए थे। स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक विचारों में उत्तम कोटि की बौद्धिकता और गहनता अमूल्य हीरों की तरह उपलब्ध है। यह बात विचारक जयंत श्रीकांत सहस्त्रबुद्धे ने कही। वे बोले- शिक्षा के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विवेकानंद का था। उनका लक्ष्य समाज सेवा, जनशिक्षा, धार्मिक पुनरुत्थान और शिक्षा के द्वारा जागरुकता लाना, मानव की सेवा आदि था। अगर सामाजिक परिवर्तन आता है, तो स्वामीजी के शिक्षा संबंधी मौलिक चिंतन से।
स्वामी अमूर्तानंदपुरी स्मृति व्याख्यानमाला के पहले दिन बुधवार रात 9.30 बजे नगरपालिका टाउनहॉल में स्वामी विवेकानंद : वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर व्याख्यान हुआ। यह रात 11.30 बजे तक चला। इसमें बीएससी इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर, अभा संगठन सचिव विज्ञान भारती, पूर्व प्रांत प्रचारक श्री सहस्त्रबुद्धे ने विचार रखे। उन्होंने स्वामीजी की भारत से लेकर फ्रांस अमेरिका तक की यात्रा को शब्दों में पिरोया और श्रोताओं को भी चिंतन के लिए मजबूर किया। संचालन शंभुसिंह मनहर ने किया। अध्यक्षता एडवोेकेट देवेंद्र पाठक ने की। मंच पर समिति अध्यक्ष श्याम पाटीदार मौजूद थे। सरस्वती वंदना बरखा मंडलोई, पूजा मंडलोई साथियों ने की। मानसी देव ने गीत प्रस्तुत किया।
संदेशमें नजर आती है सपनों के भारत की रूपरेखा - उन्होंनेकहा- स्वामी विवेकानंद का दृष्टिकोण आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक सोच का अद्भुत संगम था। वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणा स्रोत थे। उनके विचारों से ही गांधीजी की देशभक्ति हजारों गुना बढ़ी। उन्होंने भारत के संपूर्ण विकास, समृद्धि, शांति एवं प्रगति के लिए सपने संजोए थे। स्वामीजी के कार्यों, प्रवचनों एवं रचनाओं को देखकर उनके सपनों के भारत की रूपरेखा को सहज ही समझा जा सकता है। भारत के नीति निर्माता पश्चिमी सोच से प्रभावित हैं। इसी कारण देश में निरंतर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। यदि नीति निर्माता स्वामी विवेकानंद के विचारों और सपनों को आत्मसात कर नीतियों का निर्धारण करें तो निश्चय ही सभी समस्याओं का सहज समाधान मिल सकता है।
व्याख्यानमाला के दूसरे अंतिम दिन गुरुवार पेसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर के अध्यक्ष एवं चित्तौड़ के प्रांत संघ चालक भगवतीप्रसाद शर्मा का व्याख्यान होगा। वे परिवार,