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मैं तो विभाग का ही हूं, मेरा भी कटेगा चालान!

7 वर्ष पहले
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चालानीकार्रवाई और सिर पर जेब से 100 रुपए निकलने की सिकन। बुधवार सुबह चेहरे के बदले भाव आम बाइक चालकों के नहीं बल्कि पुलिस जवानों कलेक्टोरेट के कर्मचारियों के चेहरों पर नजर आए। किसी ने कहा- सर! आज छोड़ दीजिए, आगे से पहन लूंगा हेलमेट। मेरा हेलमेट दोस्त के घर रखा है वही लेने जा रहा हूं। अरे सर मेरा भी चालान कटेगा। मैं तो विभाग का ही हूं। प्लीज आगे से पहन लेंगे, अभी चालान मत काटो। निवेदन, प्रार्थना किसी की नहीं चली क्योंकि हेलमेट पहनने को लेकर निर्देश कलेक्टर, एसपी के थे। कार्रवाई कलेक्टोरेट, एसपी कार्यालय गेट पर सुबह 10.30 से दोपहर 12 बजे तक चली। करीब 40 पुलिस जवान कर्मचारियों के चालान बनाए गए। टारगेट में पुलिस जवान ज्यादा रहे। ट्रैफिक प्रभारी आनंद चौहान ने बताया हेलमेट को लेकर पहले जवाबदारों को सजग करने की जरूरत है, इसके बाद आम पब्लिक को। चालानी कार्रवाई जारी रहेगी।

मेडम स्कार्फ छोड़ो हेलमेट लगाओ

कुछमहिलाएं मुंह पर स्कार्फ बांधकर भी निकली। ट्रैफिक जवानों ने उन्हें रोका और हेलमेट पहनने की हिदायत दी। वैसे तो कार्रवाई हेलमेट पर केंद्रित रही।

विभाग का हवाला भी काम नहीं आया

पुलिसलाइन में रहने वाले सब इंस्पेक्टर को बिना हेलेमट गाड़ी चलाते हुए ट्रैफिक जवानों रोका तो वे सकपका गए। चालान काटा तो वे खुद को विभाग का होना बताने लगे।

कार्रवाई के दौरान पुलिस जवान के पास रुपए नहीं थे। कार्रवाई कर रहे साथी ट्रैफिक जवान से ही 100 रुपए उधार लेकर राशि दी। बिना हेलमेट वाहन चला रहे जवानों को यकीन नहीं था कि सख्ती इतनी होगी।

उधार लेकर चुकाई चालानी राशि

कार्रवाई के बाद एसपी कार्यालय का बाबू हेलमेट पहनकर आया और अफसरों से कहा- अब ले आया हूं, रोज लगाऊंगा।

कार्रवाई