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स्वामी विवेकानंद के संदेश और संस्कार पर तानाबाना बुनेंगे

7 वर्ष पहले
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स्वामीअमूर्तानंदपुरी स्मृति व्याख्यानमाला 11 12 दिसंबर की रात 9 बजे नगरपालिका टाउनहॉल में होगी। पहले दिन स्वामी विवेकानंद : वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जयंत श्रीकांत सहस्त्रबुद्धे दूसरे दिन परिवार, संस्कार और संचार माध्यम पर भगवतीप्रसाद शर्मा व्याख्यान से शब्दों का ताना-बाना बुनेंगे। आयोजन से एक ओर जहां विवेकानंदजी की शिक्षा संदेश से नवयुवकों में संजीवनी का संचार कैसे हो पर विचार होगा वहीं गुम होते संस्कारों की गहराई भी नापी जाएगी। व्याख्यानमाला आयोजन समिति ने कार्यक्रम की तैयारियां कर ली हैं। समिति सदस्यों ने श्रोताओं से कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया है।

स्वामी अमूर्तानंदजीपुरी

पंडितपूज्य श्री माधवराज सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरुजी जन्मजात आध्यात्मिक पिपासु थे। श्री गुरुजी नागपुर में श्रीरामकृष्ण आश्रम के प्रमुख स्वामी भास्करेश्वरानंदजी के संपर्क में आए। यहां उनका परिचय अमिताभ महाराज से हुआ। उनके सहयोग से श्री गुरुजी बंगाल के सारगाछी स्थान पर गए। यहां श्रीगुरूजी की आध्यात्मिक सतगुरु की खोज पूरी हुई। यहीं श्री अमिताभ महाराज बाद में श्री अमूर्तानंदजी के नाम से विख्यात हुए। नागरूप से आध्यात्मिक व्यक्तित्व की राष्ट्र समर्पित संत के रूप में जीवन यात्रा शुरू हुई।

परिचय

भगवतीप्रसाद शर्मा

अध्यक्षपेसिफिक युनिवर्सिटी, उदयपुर, राष्ट्रीय सह संयोजक स्वदेशी जागरण मंच, विश्व व्यापार संगठन में सरकार के प्रतिनिधि।

जयंत श्रीकांत सहस्त्रबुद्धे

बीएससीइलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर, अभा संगठन सचिव विज्ञान भारती, पूर्व प्रांत प्रचारक, निज सचिव सर कार्यवाह।

व्याख्याकारों की प्रोफाइल