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फसलों के लिए 19 हजार मैट्रिक टन यूरिया और चाहिए
जिलेमें 67.05 प्रतिशत रबी की बोवनी हो गई है। किसानों ने 1.51 लाख हेक्टेयर गेहूं के लक्ष्य में से 1.23 लाख चने के 22 हजार 115 हेक्टेयर लक्ष्य में 13 हजार 917 हेक्टेयर में बोवनी कर दी है। लगभग एक माह की फसल होने को गई। इसके बावजूद किसानों को यूरिया का इंतजार करना पड़ रहा है। जिले में 30 हजार मैट्रिक टन यूरिया की जरूरत है। अब तक 11 हजार 118 मैट्रिक टन यूरिया ही आया है। इसकी बिक्री के बाद जिले की 129 सहकारी संस्थाओं में मात्र 150 मैट्रिक टन यूरिया ही बचा है। अफसरों ने कहा, सोमवार को रैक लगाई है। मंगलवार-बुधवार में 18 हजार मैट्रिक टन यूरिया आने की उम्मीद है।
^खाद की आपूर्ति की जा रही है। रैक लगा दी है। सोमवार-मंगलवार को खाद मिल जाएगी। कालाबाजारी ब्लैक में खाद बेचने की शिकायत किसान सीधे िवभाग में करें। कार्रवाई करेंगे। -रेवासिंहसिसौदिया, उपसंचालक कृषि
यह हुई आपूर्ति
{67.05प्रतिशत लक्ष्य के विरुद्ध हुई बोवनी
{51.419 हेक्टेयर में हुई गेहूं बोवनी
{13917 हेक्टेयर में हुई चने की बोवनी
यूरियाकी स्थिति
{30हजार मैट्रिक टन लक्ष्य
{11118 मैट्रिक टन आया
{150 मैट्रिक टन अभी उपलब्ध
यह है लक्ष्य
1.51 लाखहेक्टेयर रबी सीजन का लक्ष्य
1.23लाखहेक्टेयर गेहूं का का लक्ष्य
22115हेक्टेयरचने का लक्ष्य
इसलिए बढ़ी खपत
बारिशके बाद किसानों ने गेहूं चने की बाेवनी की थी। अब किसान फसलों की सेहत बनाने में जुटे हैं। यूरिया का छिड़काव बोवनी से ही शुरू किया था। जो स्टॉक था वह खत्म हो गया। अब सिंचाई का दौर चल रहा है। फसलों की ग्रोथ तेज हो इसलिए खाद की जरूरत पड़ी है।
ब्लैकमें बिक रहा
सहकारीसंस्थाओं में खाद की कमी एक दम से आई है। फसलों में खाद की पूर्ति की के लिए किसानों को महंगे दामों पर बाजार से खरीदारी करना पड़ रही है। सोसायटी में यूरिया का एक बैग 286 रुपए में मिल रहा है, बाजार में किसानों को इसकी कीमत 350 से 400 रुपए तक देनी पड़ रही है।
रबी फसल
गेहूं की फसल एक माह की हो चुकी है, अब उसे खाद की जरूरत है।