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45 दिन तक काम कराया रेंजर ने नहीं दी मजदूरी
झाबुआके मजदूरों ने करीब 45 दिन तक कमरतोड़ मेहनत कर वन विभाग की जमीन पर गड्ढे खोदे। 40 से अधिक महिला-पुरुष मजदूर दिन-रात काम में लगे रहे, लेकिन जब पैसे देने की बात आई तो रेंजर ने गाली-गलौज कर कुछ रुपए देकर उन्हें भगा दिया। मजदूर अपने बच्चों को लेकर दो दिन से भूखे-प्यासे भटक रहे हैं।
बस स्टैंड पर बैठे झाबुआ से आए मजदूरों ने यह व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया सनावद वन वृत्त के रेंजर लक्षा सोलंकी ने काम की एवज में पूरा पेमेंट देने के बजाय दुत्कार कर भगा दिया। बच्चे इलाज और भूख के अभाव में बिलख रहे थे। तब बड़वाह में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बाबूलाल जैन महिला बाल विकास विभाग के अनिल जैन ने उनका सहयोग किया। दो दिन से बस स्टैंड पर डेरा डालकर बैठे हैं। मामले की शिकायत डीएफओ कार्यालय पहुंचकर उपवन मंडलाधिकारी डीके सुल्या को की।
दीपावलीके 15 दिन पहले बुलाया था
मजदूरोंके ठेकेदार बाबू पिता पांगल्या निवासी झाबुआ ने बताया रेंजर से मजदूरी की राशि खरी-पक्की कर दीपावली के 15 दिन पहले से सनावद के सगड़ियांव गांव में मजदूरी के लिए बुलाया था। यहां पौधे, तार फेंसिंग पानी के लिए बड़े-बड़े गड्ढे किए थे। करीब 4 दिन पहले हमारा काम खत्म हुआ। निर्धारित दर से कार्य की राशि करीब 5 लाख बनी। जब रेंजर से हिसाब-किताब कर पैसे लेने गए तो उसने कहा 30 हजार की राशि तुम्हें दी जा चुकी है। वहीं उपवन मंडलाधिकारी श्री सुल्या ने कहा आरोप झूठे हैं। 4.69 लाख में से 1.30 लाख रुपए दिए जा चुके हैं। जहां तक गाली-गलौज का सवाल है रेंजर अभी अवकाश पर हैं। उनसे पूछताछ की जाएगी।
बस स्टैंड पर बैठे झाबुआ के मजदूर।