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सेंड ब्लास्टिंग कर सिद्धवरकूट मंदिर को दिया नया स्वरूप
शहरसे करीब 35 किमी दूर खंडवा जिले में आने वाले जैन समाज के सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट का समाजजन ने बड़ी शिद्दत के साथ जुड़कर कायाकल्प कराया है। करीब 1800 साल पुराने मंदिर को नया स्वरूप दिया गया है। पहले इसे करीब 800 साल पुराना मंदिर माना जा रहा था, लेकिन इतिहासविदों ने जब इसके साक्ष्य खोजे तो यह 1800 साल पुराना मंदिर निकला। आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से भी इसके प्राचीनतम होने की पुष्टि हुई है। यहां जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की प्रतिमा है। पुराना मंदिर जो विभिन्न प्रकार के रंगों से रंगा था उसे सेंड ब्लास्टिंग कर पूरी तरह नया स्वरूप दिया गया है। दुबई से बुलाई गई शीट से मंदिर की छत को भी नया स्वरूप दिया गया है। मंदिर ट्रस्टी उद्योगपति प्रदीपकुमार कासलीवाल ने बताया मंदिर के गेट रूख भी बदला गया है।
सिद्धवरकूट मंदिर को कायाकल्प कर नया स्वरूप दिया गया है।
विशुद्धसागरजी का सिद्धवरकूट के लिए विहार शुरू
सर्वतोभद्र सिद्धवरकूट महामहोत्सव में 14-15 दिसंबर को शामिल होने के लिए श्रमणाचार्य 108 विशुद्धसागरजी महाराज ससंघ ने कन्नौद से सिद्धवरकूट के लिए पद विहार 10 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से प्रारंभ कर दिया है। वह पैदल विहार कर सिद्धवरकूट पहुंचेंगे। सनावद, बड़वाह, महेश्वर, मंडलेश्वर, खंडवा आदि स्थानों के समाजजन बड़ी संख्या में कन्नौद पहुंचे। वहां श्रमणाचार्यजी के चरणों में श्रीफल समर्पित कर सिद्धवरकूट निमाड़ प्रवास के लिए निवेदन किया। समाजजन ने कन्नौद से भैसून तक 16 किमी का पद विहार भी संघ के साथ किया सायंकालीन प्रतिक्रमण गुरुभक्ति भी की बड़वाह से महासमिति के संभागीय अध्यक्ष कैलाशचंद जैन, नेमिनाथ दि.जैन मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन, सिद्धवरकूट कमेटी के उपाध्यक्ष संतोष जैन (मामा), मंडलेश्वर से मनोज जैन, महेश्वर से श्रेणिक मंडलोई, सनावद से संगीता पाटोदी, हीरामणि भूंच, हेमंत काका, देवेन्द्र बडज़ात्या, मनीष चौधरी, महोत्सव के सहयोगी आजाद जैन मनीष जैन शामिल हुए।