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पुरस्कार नहीं गाय की सेवा ही उनका ध्येय

7 वर्ष पहले
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नगरनिमाड़ के भामाशाह रामस्वरुप अग्रवाल के पिता चंपालाल अग्रवाल 81 वर्ष की उम्र में भी गाय की सेवा करने को अपना परम धर्म मानते हैं। आज भी निमाड़ी, सोनी, काबरी गायों से उनका बाड़ा भरा हुआ है। प्रतिदिन सुबह से ही गायों की नियमित रुप से देखभाल करना, उनके लिए हरा चारा खरीदना, जैविक खेती की मक्का की चरी चारा पैदा कर गायों को नियमित देना, समय-समय पर टीके लगवाने के साथ ही प्रत्येक किसान को गाय पालने के लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

श्री अग्रवाल देशी गाय का दूध सेवन करने के साथ ही गोमूत्र के अर्क से असाध्य रोगों को दूर करने की सलाह भी लोगों को देते हैं। श्री अग्रवाल के पास वर्तमान में करीब 10 से अधिक देशी गाय हैं। इनके बच्चे सो अलग। गाय प्रतिदिन 12 लीटर दूध देती है। विदेशी नस्ल की गायों के बजाए देशी गाय की सेवा को वे श्रेष्ठ मानते हैं। श्री अग्रवाल ने कई किसानों को समय-समय पर केड़ियां (गाय के बच्चे) भेंट कर चुके हैं।

पशु डॉक्टर एमएच अंसारी ने जब उन्हें गोपालन पुरस्कार योजना के बारे में जानकारी दी तो श्री अग्रवाल ने कहा - पुरस्कार नहीं गाय की सेवा ही उनका प्रमुख ध्येय है। आप चाहे तो गायों का दूध का परीक्षण कर सकते हैं। अग्रवाल घर पर गाय के दूध से बना देशी घी दूध का सेवन करते हैं। प्रतिदिन छाछ नि:शुल्क प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में वे जीवदया गोशाला के अध्यक्ष भी हैं। गोशाला निर्माण के लिए उन्होंने 40,000 रुपए से अधिक की राशि दान की है।

गायों की सेवा में लगे चंपालाल अग्रवाल।