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हल चलाकर उखाड़ रहे मिर्च फसल

7 वर्ष पहले
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मिर्चफसल पर वायरस के अटैक से फसल सूखने लगी है। बारिश के कारण पहले कोकड़ा अब चुर्रा-बुर्रा रोग आने से किसान अपने खेतों से फसल उखाड़कर फेंक रहे हैं। कोई हाथ से फसल उखाड़ रहा है तो कोई बैल जोतकर। फसल को अभी चार महीने हुए हैं। फली पर ही कीटों का प्रकोप लगने से फसल सूूख रही है। राजस्व विभाग ने अभी तक सर्वे शुरू नहीं किया है। आक्रोशित किसानों ने फसल उखाड़ कर कलेक्टोरेट तक आए। लेकिन अभी तक प्रशासन ने कोई उचित पहल नहीं की है। खरगोन जिले में इस साल 49 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मिर्च फसल लगी है। जिले में करीब 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान की संभावना है। नुकसान के कारण बेड़िया मंडी में आवक प्रभावित होगी। यहां 2013-14 में दो अरब 47 करोड़ का कारोबार हुआ था। विशेषज्ञों की माने तो नुकसान बढ़ता गया तो इस साल एक अरब का आंकड़ा छूना भी मुश्किल हो जाएगा। अफसरों का कहना है नुकसान का अभी आंकलन नहीं किया गया है।

खरगोन जिले के प्रमुख मिर्च बेल्ट बेड़िया में हर साल मिर्च की आवक लगातार बढ़ रही थी। 2013-14 में आवक 5 लाख 60 हजार 868 मैट्रिक टन थी। इस बार यह आवक काफी कम होनेे की आशंका जताई जा रही है। मंडी सचिव एमआर जमरे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र से फसल खराब होने की सूचना रही है। इस बार मंडी में आवक प्रभावित हो सकती है। मंडी में अक्टूबर में आवक शुरू होगी। इस बार माल निर्यात करने की स्थिति भी फसल उत्पादन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही हो सकेगी।

एक एकड़ पर 10-15 हजार रुपए आई लागत

किसानोंके अनुसार एक एकड़ क्षेत्र में किसान 10-15 हजार रुपए खर्च कर मिर्च फसल तैयार करना पड़ी। ऐसे में सनावद क्षेत्र के किसानों काे करीब 7-8 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। अब फसल उखाड़ने में श्रम अौर पैसा दोनों लग रहा है।

यह है चुर्रा बुर्रा रोग

आंचलिकअनुसंधान केंद्र कृषि वैज्ञानिक विशेषज्ञ वायके जैन ने बताया चुर्रा बुर्रा (लीफकल वायरस) एक प्रकार का वायरस है। यह पत्तियाें को छोटी कर देता है। इस बार किसान मौसम के कारण दवा समय पर नहीं छिड़क पाए। सफेद मक्खी बीमार से स्वस्थ्य पौधे में बीमारी फैलाती है। मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण इस मक्खी को किसान समय रहते कीटनाशक छिड़ककर खत्म नहीं कर सके। इस कारण यह दूसरे पौधों में फैलती गई।

जिले में मिर्च पर वायरस, राजस्व विभाग ने शुरू नहीं किया सर्वे; किसान लगा रहे