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ईओडब्ल्यू ने सांईप्रसाद कंपनी का ऑफिस सील किया, संपत्ति कुर्की पर फिलहाल रोक

5 वर्ष पहले
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कार्रवाई
सेबी की शिकायत पर मुंबई से पहुंची टीम ने पंचनामा बनाया

पंजीयन कार्यालय में पत्र देकर आदेश से पहले कुर्की नहीं करने को कहा
मध्यप्रदेश सहित देशभर में खाद्य उत्पाद बेचने के लायसेंस पर हजारों लोगों की एफडी व आरडी कर झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाली सांई प्रसाद चिटफंड कंपनी के खिलाफ मुंबई आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की दो सदस्यों की टीम गुरुवार को शहर पहुंची। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की शिकायत पर कंपनी के सनावद रोड स्थित दफ्तर की सामग्री का पंचनामा बनाकर सील किया। जिला पंजीयक को कंपनी ऑफिस की सामग्री व जमीन की खरीदी-बिक्री न करने की सूचना दी। अब बिना कोर्ट के आदेश संपत्ति की बिक्री नहीं होगी। हाल ही में कलेक्टर नीरज दुबे ने कंपनी के अफसरों को नोटिस देकर जवाब मांगा था, जवाब न देने पर कुर्की की चेतावनी जारी की थी।

ईओडब्ल्यू टीम ने सुबह 11.30 बजे कार्रवाई के लिए कोतवाली पुलिस से सहयोग मांगा। दोपहर 3 बजे सब इंस्पेक्टर महेश तांबे व आरक्षक सुरेश बड़गुर्जर ने कंपनी के आॅफिस बाय अशोक चौहान की उपस्थिति में आॅफिस सील किया है। टीम ने आॅफिस में जांच कर शहर के दो लोगों के हस्ताक्षर से पंचनामा बनाया। इसके बाद टीम जिला पंजीयन कार्यालय पहुंची। यहां सहायक ग्रेड 2 मुकेश अमगा को कार्रवाई के दस्तावेज सौंपे। इसमें सांईप्रसाद कंपनी की संपत्ति बिक्री पर रोक लगाई। टीम ने आईपीसी की धारा 188, 406, 409, 420, 120 (बी) 34 आईपीसी चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन (बेनिंग एक्ट) 1978 के तहत मामला दर्ज किया है। सांई प्रसाद कंपनी के खिलाफ 6 साल पहले 30 जनवरी 2011 को पहली बार शिकायत पर जांच हुई। खरगोन मुख्यालय पर जिले व क्षेत्र के लोगों ने करोड़ों रुपए निवेश किया है। ज्यादातर लोगों की 2009 में मैच्योरिटी डेट पूरी हो गई, लेकिन जब पैसा देने की बारी आई तो कंपनी भाग गई।

आगे क्या : राशि मिलने की उम्मीद
ऑफिस सील करने के बाद जिलेभर के हजारों निवेशकों का राहत मिल सकती है। मुंबई की ईओडब्ल्यू टीम के मुताबिक मामले की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी जाएगी। कोर्ट कंपनी प्रबंधन से चल-अचल संपत्ति बिक्री कराकर निवेशकों की राशि दिला सकती है। निवेश के ऐसे ही अन्य मामलों में कार्रवाई की गई है।

निवेशक यहां दर्ज कर सकते हैं शिकायत
निवेशक ईओडब्ल्यू व सेबी को शिकायत कर सकते हैं। निवेशक ऑफिस आॅफ द सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर, ईओडब्ल्यू जनरल चेटिंग, ट्रैफिक ट्रेनिंग बिल्डिंग सेकंड फ्लोर, हंसराज लेन, बिहाइंड भायखला पुलिस स्टेशन मुंबई -400027, ऑफिसर आॅफ द पुलिस इंस्पेक्टर, ईओडब्ल्यू (एसआईटी) सेल्स टैक्स बिल्डिंग, ग्राउंड फ्लोर, नेसबिट रोड, मजगांव, मुंबई, डिप्टी कमिश्नर आॅफ पुलिस (ईओडब्ल्यू), ऑफिस आॅफ कमिश्नर ऑफ पुलिस, नियर सीएसटी रेलवे स्टेशन मुंबई। इसके अलावा सीधे 098703-36435, 098214-37673, 098216-31228 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

आरक्षक को नकली ऑफिसर समझे लोग
सुबह 10.30 बजे मुंबई ईओडब्ल्यू आरक्षक सुरेश बड़गुर्जर कंपनी के सनावद रोड स्थित आॅफिस पहुंचे। भनक लगते ही मीडियाकर्मी जानकारी लेने पहुंच गए। जानकारी चाही तो आरक्षक ने थाने चलकर बात करने को कहा। कुछ लोग आरक्षक को फर्जी आॅफिसर समझे। कोतवाली में सब इंस्पेक्टर महेश तांबे ने एसपी अमितसिंह को जानकारी दी।

3 करोड़ ऑफिस की कीमत, भीकनगांव-भगवानपुरा में 200 एकड़ जमीन
जिले में एजेंटों के माध्यम से हजारों लोगों को दोगुना राशि व 12 से 19 प्रतिशत ब्याज का रिटर्न लालच देकर राशि जमा कराई। सिक्यूरिटी में जमीन का हवाला दिया था, लेकिन कंपनी ने कई जमीन नहीं खरीदी थी। बाद में कंपनी ने भीकनगांव व भगवानपुरा में 400 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी। 2009 से लोगों को जमा राशि देना बंद कर दिया था। शिकायतों के बाद कंपनी ने दो साल तक खुले रूप से काम करना बंद कर दिया। जिले में अभी भी काम चल रहा है। ऑफिस छह साल पहले खरीदा गया था। फिलहाल उसका बाजार मूल्य करीब 3 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी नहीं
सांईप्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनी पुणे 2006-07 से जिले सहित क्षेत्र में काम कर रही थी। कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक के पास कारोबार का पंजीयन नहीं है। साथ ही धन जुटाने के लिए सेबी से भी मंजूरी नहीं ली थी। निरीक्षक महेश तांबे के मुताबिक सेबी ने 4 जनवरी 2015 को कारोबार बंद करने के आदेश दिए। साथ ही सभी निवेशकों का बकाया पैसा लौटाने को कहा था। सेबी को पता चला कि कंपनी अपना कारोबार लगातार कर रही है। इसके लिए दूसरे नाम का सहारा ले रही थी। दिसंबर 2015 में सेबी ने ईओडब्ल्यू मुंबई में केस दर्ज कराया। इसके बाद जांच शुरू हुई। एक सप्ताह से प्रदेशभर में कार्रवाई चल रही है।

छह महीने से ऑफिस बंद,

निवेशक रोज मांगते थे राशि
ऑफिस चार-पांच साल से बंद बताया जा रहा है, लेकिन आसपास के लोगों का कहना है इंदौर के अरविंद जैन, खरगोन के संजय गोस्वामी व अशोक चौहान काम कर रहे थे। सितंबर 2015 में ऑफिस पूरी तरह बंद हो गया। मैच्योरिटी राशि पूरी होने पर निवेशक यहां पहुंच रहे थे। एक महीने में चेक की औपचारिकता मुंबई स्थित कार्यालय से पूरी होती थी। यह चेक बैंक में जमा होने पर बाउंस हो रहे थे। इसे लेकर कर्मचारियों के साथ निवेशकों का विवाद हो रहा था।

सांईप्रसाद कंपनी ऑफिस में जांच के दौरान पुलिस की मौजूदगी में पंचनामा बनाती टीम।

आरक्षक सुरेश बड़गुर्जर ऑफिस को सील करते हुए।

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