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संतों के बताए मार्ग पर चलें, समाज व देश के प्रति रहें सर्मपित

4 वर्ष पहले
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शुक्रवार को महेश्वरी समाज ने संतशिरोमणी महाराज की 665वीं पुण्यतिथि महेश्वरी समाज भवन में मनाई। नामदेव महाराज प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान समाज के महिला मंडल द्वारा 15 छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता प्रमाण पत्र दिए गए। समाजजन ने आकर्षक झाकियां बनाई। भंडारा में 600 से ज्यादा समाजजन ने प्रसाद ग्रहण किया।

महेश्वरी समाज सेवक अंबादास बोरसे ने बताया संतों के बताए मार्ग पर चलें, समाज और देश के प्रति हमेशा समर्पित रहें। गरीब परिवार में जन्में महाराज ने अपना जीवन समाज को जागरूक करने में व्यतीत किया। धर्म के प्रति सभी को जागरूक किया। शिरोमणी महाराज समाज के महान संत हुए। समाज के लिए उन्होंने बलिदान दिया। समाजजन अब हर साल उनकी पुण्यतिथी मनाते हैं। महाराज के बताए हुए मार्ग पर चलते हैं। महाराज ने समाज को उपदेश दिया कि जीवन में हमेशा अच्छा कार्य करना चाहिए। सही रास्ते पर चलना चाहिए। इससे जीवन में किसी भी प्राणी को दुख नहीं आता। समाज और देश के प्रति समर्पित रहना चाहिए। जब इंसान दूसरों की तकलीफ समझता हैं। मदद करता है तभी उसकी पहचान इंसान के रूप में होती है। पशु-पक्षी भी अपने साथी को मुसीबत में देख उसकी मदद को तत्पर रहते हैं। शिरोमणी महाराज ने अपने शरीर को तकलीफ देकर समाज को संगठित करने के बारे में सोचा। तुकाराम महाराज, नामदेव महाराज, चैनामहाराज, संत गोराकुमार सहित समाज के अन्य संतों ने समाज के प्रति जीवन सर्मपित कर दिया। सभी संतों ने समाज को नशामुक्ति का संदेश दिया। बोरसे ने बताया समाज में जो इन संतों को श्रद्धा और विश्वास से मानते हैं वो कभी गलत रास्ते पर नहीं चलते। नशे से दूर रहते हैं। परिवार भी खुश रहता हैं। इस दौरान सभा अध्यक्ष काशिनाथ सुरड़कर, सचिव पवण हुरपडे़, दीपक चौधरी, अंबादास बोरसे, संजय सुरड़कर सहित सैकड़ो समाजजन मौज्ूद थे।

समाजजन ने राधा-कृष्ण, विठ्‌ठोबा-रुकमणी, संत जैनाबाई की आकर्षक झांकियां बनाई। इन्हें विशेष रुप से बच्चों के लिए बनाया गया था। झांकियों के माध्यम से बच्चों को संतों के बारे में जानकारी दी गई।

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