प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाए, विधायक को ज्ञापन सौंपा
मनरेगा योजनांतर्गत सभी संविदा अधिकारी-कर्मचारी, ग्राम रोजगार सहायक संघ के आठ दिनी कलमबंद हड़ताल के चौथे दिन गुरुवार को भी आंदोलन जारी रहा। नियमितीकरण के अधिकार को लेकर जारी संघर्ष शिवराज सरकार उपेक्षा कर रही है। इस पर संघ के सदस्यों ने विधायक बाला बच्चन को ज्ञापन सौंपा।
विधायक बाला बच्चन ने मनरेगा अधिकारी-कर्मचारी, रोजगार सहायक को पूर्ण रूप से सहमति देते हुए संविदाकर्मियों को नियमितीकरण करने का आश्वासन दिलाया। उन्होंने संघर्ष हमारा नारा है, संविदा हमारी कुंजी है, जो संविदा हित में काम करेगा वहीं प्रदेश में राज करेगा, शिवराज सरकार हमारी मांगे पूरी करो पूरी करो के नारे बुलंद किए।
संघ के सदस्यों ने बताया शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जन-जन को दिलाने वाले व जरूरतमंदों को सभी संविदाकर्मी व ग्राम रोजगार सहायकों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। नियमितीकरण की आवाज कानों तक नहीं पहुंच रही है। आंदोलन का विपरीत प्रभाव जरूरतमंदों पर पड़ने के बाद सरकार का मन नहीं पसीज रहा है। ग्राम पंचायत में रोजगार सहायकों ने मनरेगा के क्रियान्वयन, समग्र सामाजिक पोर्टल, पेंशन, फीडिंग, जन धन योजना के बैंक खाते, बीपीएल व आधार कार्ड, पंचायत दर्पण पर फीडिंग करना हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में भूमिका सभी संविदा कर्मी-ग्राम रोजगार सहायक, अपना नैतिक दायित्व समझकर निभाता रहा है। संघ के जिला अध्यक्ष सागर ठाकुर, जिला अध्यक्ष संविदा कर्मचारी महासंघ के सुनिल ब्राह्मणे, प्रदेश महामंत्री सुमेर बड़ौले, राजपुर ब्लाॅक अध्यक्ष जितेंद्र सोनी, गंजानंद मोरे, जीतू कौशल, गोविंद कुशवाह सहित अन्य ब्लाकों से पदाधिकारी शामिल हुए।
25 से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे
ठीकरी| जनपद परिसर में मनरेगा के अफसर व कर्मचारी व ग्राम रोजगार सहायकों ने धरना दिया। मनरेगा संघ की शासन से समान कार्य समान वेतन की मांग व नियमितीकरण की मांग को लेकर कलमबंद हड़ताल रहेगा। फिर भी शासन ने यदि मांगों नहीं मानी गई तो 25 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
12 घंटे काम पर मिलता है 5 हजार रुपए वेतन
ग्राम रोजगार सहायकों 10 से 12 घंटे तक जनहित व शासन की योजना के क्रियान्वयन दे रहे हैं। इस के लिए ग्राम रोजगार सहायकों को 5 हजार का वेतन मिलता है। वह भी चार से पांच माह के लंबे इंतजार के बाद जनपद व जिला के कर्मचारियों को मिन्नते करने के वेतन नहीं भीख मांग रहे हो। काम की तुलना में पारिश्रमिक बहुत ही कम मिलता है। उसमें से भी करीब 3 हजार रुपए प्रतिमाह समीक्षा बैठकों में व्यय हो जाता है। 2 हजार रुपए में परिवार को कैसे चलेगा। ग्राम पंचायत में कार्यरत सभी ग्राम रोजगार सहायकों को सहायक सचिव घोषित करने में भी अफसर उदासीनता का आचरण कर रहे हैं। सभी ग्राम रोजगार सहायक को सहायक सचिव घोषित नहीं किया। अफसर मांगने पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शासन की शोषण नीति व अधिकारियों की दमनकारी नीति के विरोध में मनरेगा के कर्मचारी व ग्राम रोजगार सहायक संघ जब तक नियमितीकरण नहीं होगा। यह लड़ाई आगे तक जारी रहेगी।
विधायक बाला बच्चन को ज्ञापन सौंपते संघ के पदाधिकारी।