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कंपाउंडर-ड्रेसर नहीं, मरहम पट्‌टी के बिना लौटे घायल

5 वर्ष पहले
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा मिले 18 महीने का समय गुजर चुका है। बावजूद इसके यहां कंपाउंडर व ड्रेसर के रिक्त पद नहीं भरे गए हैं। ऐसे में अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को बगैर मल्लहम-पट्‌टी कराए लौटना पड़ रहा है। मल्लहम-पट्‌टी नहीं होने से परेशान मरीजों ने अस्पताल में कंपाउंडर व ड्रेसर पदस्थ करने की मांग की है।

गंज रोड निवासी अकरम खां ने बताया कि वह दो रोज पहले सड़क दुर्घटना के दौरान जख्मी हो गया था। इस घटना चेहरे व सिर में चोट आई है। डॉक्टर इलाज करने के बाद दो दिन बाद ड्रेसिंग कराने को कहा है। लेकिन कंपाउंडर व ड्रेसर नहीं मिलने से उसे निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। इसी प्रकार फतेहचंद कॉलोनी में रहने वाले पारस गर्ग ने बताया कि तीन दिन पहले उसकी उंगलियों में चोट लग गई थी। शनिवार को वह मल्लहम पट्टी कराने अस्पताल आया था। लेकिन ड्रेसर नहीं रहने से उसे बगैर ड्रेसिंग कराए ही घर लौटना पड़ा। इसी प्रकार पिपरघान रोड निवासी छोटू शर्मा की मल्लहम-पट्टी भी शनिवार को नहीं हुई।

पदों की पूर्ति शासन स्तर पर की जानी है
सिविल अस्पताल में रिक्त पदों की पूर्ति शासन स्तर पर की जानी है। इस संबंध में सीएमएचओ कार्यालय से समय-समय पर पत्र जारी किए गए हैं। जीएस राजपूत, सीएमएचओ मुरैना

कंपाउंडर-ड्रेसर के पद लंबे समय से हैं खाली
सिविल अस्पताल में तीन ड्रेसर, दो कंपाउंडर व 6 स्टॉफ नर्स के पद हैं। जिनमें दो ड्रेसर, कंपाउंडर के तीन तथा स्टॉफ नर्स का एक पद खाली है। वर्तमान में अस्पताल प्रबंधन द्वारा ड्रेसिंग कार्य के लिए स्टॉफ असिस्टेंट दौजी राम जाटव की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन वृद्ध होने के कारण जाटव अक्सर शारीरिक रूप अस्वस्थ रहते हैं। जिसके चलते वे ड्यूटी का निर्वहन करने में असमर्थ हैं।

अस्पताल में आए मरीज जिनकी शनिवार को मरहम-पट्‌टी नहीं हुई।

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