रसूख का इस्तेमाल कर विभागीय जांच रुकवाई, मातहतों पर थोप दिया आरोप
अफसर बोले- 16 फीडर हो गए कंप्लीट, हैंडओवर हुआ सिर्फ एक
शिकायतकर्ता ने भुगतान में एक करोड़ की गड़बड़ी के दस्तावेज भी जुटाए
प्राइमरी जांच के बाद दर्ज होगी एफआईआर
भास्कर संवाददाता | मुरैना
राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में 932.53 लाख रुपए के घोटाले में नाम आने के बाद मुरैना के पूर्व अधीक्षण एसके सचदेवा का रसूख इतना था कि वह एक बार पहले भी इस मामले में विभागीय जांच को रुकवा चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने अपने राजनैतिक व विभागीय संबंधों का लाभ उठाते हुए अपने ही चार मातहतों पर भी कार्रवाई की गाज गिरवा दी, जबकि ठेकेदार को किए गए भुगतान में जो गड़बड़ी हुई है, उस वक्त वह बिजली कंपनी के सर्वेसर्वा थे।
गौरतलब है कि वर्ष 2011-12 में मुरैना में अधीक्षण यंत्री के रूप में पदस्थ रह चुके एसके सचदेवा ने राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के ठेकेदार को 932.53 लाख रु का भुगतान किया था। इस मामले में एक व्यक्ति ने लोकायुक्त में शिकायत करते हुए बताया था कि अधीक्षण यंत्री ने सांठगांठ के आधार पर ठेकेदार को किए गए काम की तुलना में अधिक भुगतान किया है।
लगभग एक करोड़ रुपए के फर्जी भुगतान की जानकारी शिकायतकर्ता ने सूचना के आधार पर एकत्रित करने के बाद उसे मुकदमा रजिस्टर्ड कराने के लिए लोकायुक्त पुलिस को सौंपा था। उप पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त धर्मवीर सिंह भदौरिया ने जब प्राप्त शिकायत का परीक्षण किया तो शिकायत के तथ्य प्रमाणित पाए गए।
इस आधार पर लोकायुक्त ग्वालियर में पूर्व अधीक्षण यंत्री सचदेवा के खिलाफ प्राइमरी जांच रजिस्टर्ड की गई है। जांच का काम पूरा होने के बाद लोकायुक्त पुलिस इस मामले में असल अपराध दर्ज करेगी।
शहर में बिजली के इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम चार साल बाद भी अधूरा है।
अपने अधीनस्थों पर गिरवाई कार्रवाई की गाज
बिजली कंपनी ने 932.53 लाख रु के फर्जी भुगतान में पूर्व अधीक्षण यंत्री एसके सचदेवा को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच संस्थगित करने के आदेश जारी किए थे लेकिन सचदेवा ने उसे सांठगांठ कर रुकवा दिया और अधीनस्थ रहे पूर्व कार्यपालन यंत्री केएल चौहान, सहित एस समय के सहायक यंत्री पीएस तोमर सहित एक कनिष्ठ यंत्री पर कार्रवाई की गाज गिरवा दी।
एटूजेड पर मैनपावर व संसाधन नहीं
शहर में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही एटूजेड कंपनी के पास काम की गति बढाने के लिए न तो मैनपावर है और न ही संसाधन। निर्माण एजेंसी को जिस सामान की जरूरत महसूस होती है वह कंपनी के स्टोर में शॉर्ट होता है। इसके चलते वर्ष 2011 में शुरू हुआ काम वर्ष 2015 बीतने तक पूरा नहीं किया जा सका है।
16 फीडर का काम पूरा, हैंडओवर हुआ है सिर्फ एक
एटूजेड कंपनी ने शहर के 16 फीडरों से जुड़ी लाइनों पर केबिलीकरण का काम कंपलीट कर लिया है लेकिन अभी तक सिर्फ एक फीडर ही हैंडओवर किया है। वर्तमान में फाटक बाहर फीडर पर केबिलीकरण का काम चल रहा है। राजीव गुप्ता, अधीक्षण यंत्री बिजली कंपनी, मुरैना