सावधान! जिले में कानून व्यवस्था के लिए देरी से ही पहुंचेगी पुलिस
फॉलोअप: पर्याप्त फोर्स नहीं, स्थिति काबू करने के लिए फोर्स जुटाने में करनी पड़ती है मशक्कत
भास्कर संवाददाता | मुरैना
सावधान! जिले में कहीं कानून व्यवस्था की स्थिति बनी तो पुलिस को पहुंचने में देरी हो सकती है। इसलिए कि पुलिस के पास अतिरिक्त फोर्स मौजूद नहीं है। यह हकीकत बुधवार को बमरोली गांव में हुई घटना के बाद सामने आई। जब नहर में डूबने से हुई युवक की मौत के बाद ग्रामीण पुलिस के खिलाफ नारेबाजी व चक्काजाम करते रहे, लेकिन पुलिस अधिकारी सात घंटे तक स्थिति को काबू करने पहुंच सके। अधिकारियों का तर्क है कि उन्हें फोर्स जुटाने में देरी हुई।
अतिरिक्त फोर्स के रूप में जिले को तकरीबन 150 एसएएफ जवान उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन थानों में फोर्स की कमी के कारण इन जवानों का उपयोग विभिन्न थाना क्षेत्रों में गश्त के लिए किया जा रहा है। जिसके चलते पुलिस लाइन में 30-35 पुलिस जवान ही अतिरिक्त फोर्स के रूप में शेष रह गए हैं। ऐसी स्थिति में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने पर पुलिस को अन्य थानों व बाहरी जिलों से फोर्स की व्यवस्था करना पड़ता है जिसमें काफी समय लगता है। उपलब्ध फोर्स के साथ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचने से इसलिए कतराते हैं कि आक्रोशित लोगों की भीड़ उन्हें खदेड़ सकती है।
डर के कारण थाने में बैठे रहे अधिकारी : पुलिस कार्रवाई के दौरान नहर में डूबने से हुई युवक की मौत के बाद ग्रामीण, बमरोली गांव में शव रखकर चक्काजाम करते रहे लेकिन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। पुलिस कप्तान का कहना है कि हमने एसडीओपी बानमोर में मौके पर रवाना किया था लेकिन फोर्स न होने के कारण वे रिठौरा थाने पर थे। बाद में जब फोर्स की व्यवस्था की गई तब दोपहर एक बजे तक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बात की।
10 दिन में दो थानों के मुखिया सस्पेंड
एक ओर जनता से नजदीकियां बढ़ाने के लिए जनसंवाद जैसे कार्यक्रम अधिकारियों द्वारा आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर थानों में तैनात टीआई व थाना प्रभारियों की मनमानी जनता से दूरी का कारण बन रही है। बीते दस दिनों में दो थानों के मुखिया लापरवाही के कारण सस्पेंड किए गए हैं। जिनमें बानमोर थाना टीआई अजय चानना व रिठौरा थाना प्रभारी गौरव शर्मा शामिल हैं। चानना को पिछले दिनों चंबल में जीप गिरने से एसआई की हुई मौत के बाद सस्पेंड किया गया था।
डायल-100 नहीं आ रही लोगों के काम
पुलिस अधिकारियों द्वारा दावा किया जाता है कि किसी भी घटना की सूचना के बाद डायल-100 पांच मिनिट में पहुंचती है बाहरी क्षेत्रों में पुलिस का यह वाहन 35मिनिट में कार्रवाई के लिए उपलब्ध हो जाता है। लेकिन बमरोली गांव में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने पर एक भी डायल-100 मौके पर नहीं पहुंच सकी।
30-35 जवान ही तत्काल उपलब्ध हो पाते हैं
हमारे पास 150 अतिरिक्त जवान हैं, लेकिन इनसे गश्त में मदद ली जा रही हैं। लाइन से 30-35 जवान ही तत्काल उपलब्ध हो पाते हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति बनने पर फोर्स जुटाना पड़ता है। बमरोली गांव पहुंचने में भी इसी कारण दूरी हुई। विनीत खन्ना, एसपी मुरैना
बमरोली गांव में पुलिस सात घंटे बाद पहुंच सकी थी।