स्टेडियम का नामातंरण नहीं, Rs.1.5 करोड़ से जीर्णोद्धार अटका
दो माह पहले किया ट्रांसफर
नगर निगम ने करोड़ों रुपए की लागत से बनवाए गए स्टेडियम को दो माह पहले खेल व युवा कल्याण विभाग को ट्रांसफर कर दिया था। लेकिन बीते दो महीनों में स्टेडियम का आधिपत्य खेल विभाग को नहीं मिल सका है। इस हाल में स्टेडियम लावारिस हाल पड़ा हुआ है। मामला कलेक्टर के ध्यान में होने के बाद भी उनके स्तर से तहसीलदार व निगमायुक्त को कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं।
स्टेडियम राजस्व रिकार्ड में दर्ज न होने के कारण कायाकल्प नहीं हो पा रहा हे।
भास्कर संवाददाता | मुरैना
खेल व युवा कल्याण विभाग, डेढ़ करोड़ की लागत से डा.भीमराव आंबेडकर स्टेडियम का कायाकल्प कराना चाहता है लेकिन स्टेडियम के राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं होने से जीर्णोद्धार कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति तब है जब कलेक्टर ने नामांतरण के लिए तहसीलदार को पत्र लिखा है।
कलेक्टर का पत्र 19 जनवरी को तहसीलदार को प्राप्त हो गया था लेकिन तब से अब तक स्टेडियम को राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने की कार्रवाई पूरी नहीं की जा सकी है। बीते 21 दिनों में तहसीलदार ने स्टेडियम के नामांतरण को लेकर क्या किया इसका जबाव राजस्व कर्मचारियों के पास नहीं है। स्टेडियम के राजस्व रिकार्ड दर्ज नहीं होने से खेल व युवा कल्याण विभाग स्टेडियम के कायाकल्प के लिए अपने विभाग से वित्तीय स्वीकृति नहीं ले पा रहा है। वित्तीय स्वीकृति के लिए इस बात का प्रमाण पेश करना होगा कि स्टेडियम का स्वामित्व राजस्व रिकार्ड में खेल विभाग के नाम है। स्टेडियम का नामांतरण कराने के लिए खेल अधिकारी तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
नगर निगम ने नहीं भेजा रिकार्ड
तहसीलदार नरेश गुप्ता का कहना है कि स्टेडियम के नामांतरण के लिए नगर निगम से स्टेडियम की जगह के सर्वे नंबर व क्षेत्रफल संबंधी जानकारी मांगी गई है लेकिन नगर निगम उसे अब तक उपलब्ध नहीं करा सका है।
इस मामले में आयुक्त नगर निगम नसीर अहमद खान का कहना है कि उन्हें तहसीलदार का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। यदि कोई जानकारी मांगी जाएगी तो उसे जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।
लापरवाही