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महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली, कथा शुरू

6 वर्ष पहले
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मांअम्बे मैरिज होम में गुरुवार को कलश यात्रा के साथ श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। नगर के श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया। आचार्य नरेंद्र शास्त्री ने पहले दिन श्रद्धालुओं को गोकर्ण धुंधकारी की कथा सुनाई।

शास्त्रीजी ने कथा का वर्णन करते हुए बताया कि प्रेत धुंधकारी ने कभी भगवान का पूजन करना तो दूर स्मरण तक नहीं किया था। दान, धर्म की वजाए वह जुआ, शराब, वेश्यावृति जैसी गतिविधियों में वह लीन रहा। जिसके चलते एक वैश्या ने ही धुंधधारी की हत्या कर दी। अकाल मौत होने से धुंधधारी को प्रेत योनि में भटकना पड़ा।

दूसरी और आचार्य ने गौकर्ण की कथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने प्रभु कृपा से भागवत कथा का रसपान कर अनेक शक्तियों को अर्जित कर लिया। जिसके चलते उन्होंने प्रेत धुंधधारी का उद्धार किया। कल्याणी देवी महेश राठौर द्वारा भागवत कथा की आरती उतारने के बाद कथा का समापन किया गया।

मनुष्य के जीवन में दु:ख आने के क्या कारण रहे इसे जाने बिना वह भगवान से सुख की कामना करने लगता है। प्रत्येक जीव दु:ख से बचना चाहता है और सुख की इच्छा रखता है। जबकि मनुष्य को जीवन में दु:ख क्यूं आया इस बात पर विचार कर जीवन में उसकी पुनरावृति नहीं करनी करना चाहिए। यह बात गुरुवार को बाबा लोचनदास मंदिर आयोजित सगीतमयी राम कथा के दौरान शास्त्री राजेंद्र प्रसाद ने कही। शास्त्रीजी ने कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में कर्म के अनुसार दु:ख-सुख का आना जाना लगा रहता है। जो मनुष्य अंतर्मुखी होकर स्वयं का विश्लेषण करता है उसे निश्चित ही दु:ख का कारण समझ में आएगा।

‘दुख से हरकोई बचना चाहता है’

अंबाल नगर में शहर के प्रमुख मार्गों से कलश यात्रा निकालती महिलाएं।

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