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अच्छी शिक्षा और संस्कारों के लिए अच्छे लोगों से मिलें: बालप्रभु

5 वर्ष पहले
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श्रीमद् भागवत कथा का सार ये है राम और कृष्ण को हृदय से स्वीकार करें। लोगों के साथ समाज और देश विकास के लिए मिलजुलकर सामने आएं। ये बातें पं. शैलेंद्रानंद बालप्रभु ने पुलिस ग्राउंड पर आयोजित कथा के अंतिम दिन बुधवार को समापन अवसर पर कही। मौजूदा समय में भाई-भाई आपस में लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा यदि हम आपस में ही लड़ते रहे तो हम देश और समाज के बारे में क्या सोच पाएंगे। आने वाली पीढ़ी को एकता का संदेश देना इन हालातों में संभव नहीं होगा। इसलिए हमें वापस संयुक्त परिवारों की ओर रुख करना पड़ेगा।

मन को साधकर धर्मानुकूल आचरण कर जीवन को संवारें

शाहपुर|
माचना तट पर चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन पं. अखिलेश परसाई ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के मध्य संवाद के माध्यम से जीव की जिज्ञासा, जीवन की सार्थकता और जीव के दायित्वों का वर्णन किया। कथा प्रसंग में राजा परीक्षित को सात दिन बाद मिले मृत्यु के श्राप और कैसे जिएं विस्तार से प्रस्तुति हुई। पं. अखिलेश के कहा मनुष्य को जब विपत्ति आती है, तो वह ईश्वर से समाधान की अपेक्षा करता है। कथा प्रसंग में उन्होंने कहा मन का कोई स्थूल अस्तित्व नहीं है, जैसे हम अपने शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श कर सकते हैं, देख सकते हैं।















उन्होंने कहा मन के विचारवाणी पर आते हैं। वाणी से व्यवहार बनता है।

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