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मृत दंपती के वारिस की लड़ाई में राजस्व अमला आमने-सामने
पटवारी रिपोर्ट को दरकिनार कर नायब तहसीलदार ने दिया अमल का आदेश, पटवारी ने किया इनकार।
भास्करसंवाददाता| शिवपुरी
पोहरीके ग्राम परिच्छा अहीर में रहने वाले एक वृद्ध दंपती की एक साल पूर्व मृत्यु हो गई। वे अपने पीछे करोड़ों रुपए कीमत की 22 बीघा जमीन छोड़ गए। मृत्यु के बाद उस जमीन पर हक जताने के लिए दो परिवार वारिस के रूप में सामने गए। एक महिला खुद को मृत दंपती की नातिन बता रही है, तो दूसरी महिला खुद को बहन बताकर जमीन का हक मांग रही है। पिछले एक साल से दोनों परिवार जमीन का हक लेने के लिए राजस्व महकमे में लड़ाई लड़ रहे हैं। इस पूरी कहानी का रोचक पहलू यह है कि दोनों वारिसों ने जमीन पाने के लिए अभी तक लाखों रुपए खर्च कर दिए, जिसके चलते राजस्व अमला भी अब एक-एक पक्ष का मददगार बनकर विभागीय तौर पर आमने-सामने गया। हालात यहां तक बिगड़े कि नायब तहसीलदार ने पटवारी रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए एक वारिस के पक्ष में अमल करने का आदेश दिया, लेकिन पटवारी ने उसे मानने से इनकार कर दिया। जिसके चलते पटवारी को एक माह पूर्व सस्पेंड भी कर दिया गया। मामला अभी भी अधर में लटका हुआ है।
विवादित जमीन पर अपना हक जताने के कागजात दिखाता युवक।
कुशवाह दंपती यह संपित्त छोड़ गए हैं :लपई कुशवाह और उनकी प|ी दक्खो बाई की ग्राम परिच्छा अहीर में सर्वे नंबर 24, 72, 123, 128, 138, 1027, 1028, 1032, 1034, 135, 1230 कुल किता 12 कुल रकवा 3.41 हेक्टेयर एवं सर्वे नंबर 985, 1003, 1006, 1018, 1019 कुल किता पांच रकवा कुल 3.88 में से भाग 1/4, जमीन है।
{ हल्के की पटवारी रचना राजपूत ने इस मामले में तहसीलदार पोहरी को रिपोर्ट दी कि लपई के पिता भागीरथ की एक और बहन बूंदा बाई है। इसलिए नामांतरण बूंदा के परिजन के पक्ष में किया जाए।
{ नायब तहसीलदार पोहरी शत्रुघ्न सिंह चौहान ने 28 अक्टूबर 2014 को पटवारी रचना को आदेश दिया कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की गई है, जबकि आपको कई बार मौखिक आदेश द्वारा बताया गया कि चतुरो के पक्ष में जमीन का अमल किया जाए।
{ पटवारी ने सर्वे नंबर 24 दूसरे की जमीन बताते हुए एवं चतुरो को वारिस मानते हुए बूंदा के परिजन को उसका वारिस माना है इसलिए वो अपनी कलम फंसाने से डर रही है और उसने राजस्व रिकार्ड में अमल नहीं किया।
{ आदेश मानने की वजह से नायब तहसीलदार ने पटवारी को 5 नवंबर को सस्पेंड करवा दि