अपहरणकर्ता फिरौती का कॉल करने के लिए दिल्ली से आते थे ग्वालियर
ग्वालियर | डीपीए स्कूल के छात्र रामेंद्र गुर्जर अपहरण कांड के 2 आरोपियों सतीश गुर्जर और बादल दुबे को गिरफ्तार करने के साथ ही इनसे फिरौती के रूप में लिए गए 16.20 लाख रुपए भी पुलिस ने बरामद कर लिए हैं। आरोपियों ने अपहरण से लेकर फिरौती लेने तक की जो कहानी सुनाई उससे पुलिस अफसर भी अचंभित हैं। अपहृत रामेंद्र को लेकर एक आरोपी नोएडा में रहता था तो दूसरा आरोपी ग्वालियर, मथुरा आकर फिरौती का कॉल करता था और फिर नोएडा पहुंच जाता था। फिरौती मांगने वाला आवाज और भाषा भी बदलता था ताकि पुलिस उनकी पहचान न कर पाए, लेकिन अपहरण से पहले छोड़े गए एक क्लू को पकड़कर पुलिस अपहरण करने वालों तक पहुंच गई।
एसपी हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि रामेंद्र गुर्जर अपहरणकांड को पुलिस ने पूरी गंभीरता से लिया था और जैसे ही अपहरण की सूचना पुलिस तक पहुंची घेराबंदी भी शुरू कर दी थी, लेकिन तब तक अपहरणकर्ता दूर निकल गए थे। इसके बाद बच्चे की जान बचाना प्राथमिकता थी, इसलिए घेराबंदी आक्रामक तरीके से की और इसका ही परिणाम है कि अब अपहरणकर्ता सहित फिरौती की ज्यादातर रकम भी बरामद हो गई है। आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह 1 महीने से अपहरण की योजना बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने नोएडा के न्यू अशोक नगर के ए ब्लॉक में कमरा किराए पर लिया था। यहां पर उन्हें कोई जानता नहीं था। इस दौरान यह दोनों कई बार ग्वालियर आए और डीडी नगर में सिम विक्रेता गौरव शर्मा की दुकान से 23 जनवरी को फर्जी आईडी से 3 सिमकार्ड खरीदे थे।
सतीश वारदात से 15 दिन पहले अपने ताऊ मजबूत सिंह के घर पहुंचा था और रामेंद्र की बड़ी बहन से घरवालों के फोन नंबर भी लिए थे ताकि फिरौती का कॉल किया जा सके। आरोपी दिल्ली में कीर्ति मोशन पिक्चर्स की फिल्मों में काम करते थे । यहां पर सतीश ने बताया था कि उसके बहनोई का एक्सीडेंट हो गया है, इसलिए नहीं आ पाएगा वहीं बादल ने कहा था कि उसे मलेरिया हुआ है।
हीरो बनने के लिए प्रोड्यूसर से करना थी पार्टनरशिप इसलिए चाहिए था रुपया : सतीश और बादल को फिल्मों में हीरो बनना था, इसके लिए उन्हें बताया गया था कि फिल्म निर्माण में प्रोड्यूसर के साथ रुपया भी लगाना होगा तभी हीरो का रोल मिल पाएगा। इसके बाद इन दोनों ने अपहरण करने की योजना बना ली थी।
पहले घेराबंदी की कहानी सुनाई थी अब फिरौती की रकम दिखाई : रामेंद्र के मुक्त होने के बाद पुलिस ने पलवल की फैक्टरी में घेराबंदी कर उसे मुक्त कराने की कहानी सुनाई थी। अपहरणकर्ताओं के गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने अपनी कहानी बदली और फिरौती की बात स्वीकार करने के साथ ही 16.20 लाख रुपए भी बरामद करने की बात बताई।