आठ दिन मनेगा नवरात्र का पर्व
देवीआराधना का पर्व शारदीय नवरात्र गुरुवार 25 सिंतबर से शुरु हो रहा है। इस बार नवरात्र में नवमीं तिथि क्षय होने के कारण नवरात्र 8 दिन तक ही रहेंगे। जो 2 अक्टूबर गुरुवार तक चलेंगे। इसके बाद शुक्रवार को विजय पर्व विजयादशमी मनाया जाएगा।
नगर पुरोहित पंडित मनीष पाठक ने बताया कि 24 सिंतबर को उज्जैन के समयानुसार दोपहर 11 बजकर 31 मिनिट पर प्रतिपदा लगेगी। जो 25 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 44 मिनिट तक रहेगी। बुधवार को हस्त नक्षत्र संध्या 6 बजकर 24 मिनिट पर लग जाएगा। जो अगले दिन गुरुवार को शाम 7 बजकर 56 मिनिट तक रहेगा। कलष स्थापना में हस्त नक्ष़़त्र का मिलना शुभदायक होता है।
अपूर्णरहेंगे नवरात्र : पंडितपाठक ने बताया कि इस वर्ष महानवमीं का क्षय होने से नवरात्र 8 दिनों के रहेंगे। महाष्टमी महानवमीं एक दिन होने से यह स्थिति बन रही है। इसके संबंध में पंचागों का मत अलग-अलग है। इसमें कुछ पंचाग नवमी, दशमी का सयुक्त योग बता रहे हंै। उज्जैन ,जबलपुर राजस्थान आदि क्षेत्रों के पंचागों में अष्टमी नवमी का योग दिया गया है। वहीं कुछ पंचाग दशमी के साथ नवमी का उल्लेख कर रहे हैं। बुधवार 1 अक्टूबर को सप्तमी तिथि सुबह 10 बजकर 7 मिनिट तक रहेगी। जो गुरुवार 2 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 13 मिनिट तक रहेगी। उसके बाद नवमी प्रतिकात्मक स्पर्ष रहेगा। 3 अक्टूबर शुक्रवार को संपूर्ण दिन दशमी तिथि रहेगी। कई स्थानों पर अपनी सामाजिक मान्यताओं के आधार पर नवरात्र नो दिनों को ध्यान में रखकर मनाए जाते हैं।
यहकहते हैं शास्त्र
डॉ.दीपेश पाठक ने बताया कि विभिन्न धर्म शास्त्रों में तिथियों के संबंध मे शास्त्रोक्त विचार पूर्ववती आचार्यों के दिए गए हैं। स्मृति पुराण में कहा गया है कि जब सूर्योदय में पर दिन नवमी हो तो वह सप्तमी के सहित अष्टमी कि निषाकालीन पूजन करें। दूर्गोत्सव में मदनर| ने कहा है कि जहां पर उत्तर तिथियां क्षय को प्राप्त हो जाए तो पूर्वा अष्टमी करें। वहीं दीपिका संग्रह में कहा गया है कि दुर्गा व्रत में नवमी तिथि पूर्वयुता ग्रहण करें। पद्यपुराण का वचन है कि दूर्गा नवमी, दूर्गाष्टमी, शिवरात्रि पूर्वाविद्व ग्रहण करें। हेमाद्रि मत है कि नवमी तिथि दशमी तिथि से युक्त नहीं करें।
ज्योतिषमें नवरात्र
पंडितपाठक ने बताया कि जन्म कुंडली का प्रथम पंचम नवम स्थान पार्वती, लक्ष्मी मां सरस्वती के निमित्त माना गया ह