माता के तेजस्विनी रूप के होते हैं दर्शन
क्षेत्रके गांव भंवरा इलाही माता के नाम से पहचाना जाता है। यहां पर प्राचीन काल से विराजित मां जगदंबा के दर्शन के लिए नवरात्रि में भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है। बीते गुरुवार से नवरात्रि पर्व शुरू होते ही मां के दरबार में दर्शन करने आने वाले भक्तों की भीड़ लग रही है।
उल्लेखनीय है कि दूसरे शहरों से आने वाले माता के भक्त आष्टा के गांव भंवरा को इलाई माता के नाम से जानते हैं। आदिशक्ति भवानी का ऐतिहासिक मंदिर भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। तहसील मुख्यालय से 21 किमी दूर अंतिम छोर पर स्थित भंवरा में माता इलाही का प्राचीन मंदिर स्थापित है। मंदिर समिति के अशोक परमार, शंकर परमार, ज्ञान सिंह, हिंदू सिंह परमार ने बताया कि मां जगदंबा के चमत्कारों के कारण इस मंदिर का नाम मुगल काल से चला रहा है।
उसी समय से इस मंदिर का नाम इलाई माता का मंदिर हो गया। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पिछले 25 से अधिक वर्ष पूर्व इस मंदिर में उर्दू में लिखा शिलालेख लगा हुआ था, लेकिन मंदिर के जीर्णोद्घार के समय शिलालेख निकल गया है।
इलाईमाता के दर्शन के लिए कहां से जाएं
इलाहीमाता भंवरा तक जाने के लिए आष्टा नए बस स्टैंड से प्रात: 8 बजे से वाहन उपलब्ध रहते हैं। शाम को आखिरी वाहन साढ़े पांच बजे चलता है। निजी वाहनों से जाने वाले श्रद्घालु भोपाल-इंदौर हाईवे से गांव जताखेड़ा जोड़ स्थित प्रधानमंत्री रोड से भंवरा पहुंच सकते हैं।
नवरात्रिपर बसों में उमड़ रही भीड़
नवरात्रिपर्व के शुरू के दिन से ही मातारानी के भक्त अपनी इच्छानुसार सलकनपुर, देवास, इकलेरा, भैंसा कलाली भंवरा आदि स्थानों पर दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इससे नगर के बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ देखने को मिल रही है।
माता की आराधना में जुटा पूरा गांव
गुरुवारसे नवरात्रि पर्व शुरू होते ही पूरा गांव माता की आराधना में जुट गया है। नवरात्रि के शुरू होते ही इस ऐतिहासिक मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ एकत्रित होती है। दूर-दराज से पुरुष महिला भक्त दर्शन करने आते हैं। पर्व पर माता का तेजस्विनी रूप निहारते ही बनता है।
आष्टा. भंवरा गांव में प्राचीन इलाई माता का आकर्षक श्रंगार किया गया।