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दूसरे दिन भी नहीं खरीदा दूध

6 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता | आष्टा/जावर

भोपाल सहकारी दुग्ध संघ के दूध क्रय में कमी तथा मानक स्तर बढ़ाकर दूध क्रय के साथ ही कटौत्रा रने के विरोध में शुरू की गई हड़ताल दूसरे दिन भी प्रभावशील रही। शनिवार को वह समितियां भी बंद हो गईं जो पहले दिन खुली हुई थीं। इससे छोटे दूध प्रदायक किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है।

क्षेत्र की दुग्ध समितियों के बंद होने के कारण दूध विक्रय पर निर्भर रहने वाले किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। जो अब मजबूरी में प्रायवेट डेरियों में कम दामों में दूध बेचना पड़ रहा है। जो बड़े दूध विक्रेता हैं वह दूध को घर में रखकर घी बना रहे हैं। 6 फरवरी से क्षेत्र की सभी दुग्ध समितियों में बंद का आह्वान किया था। शनिवार को भी समितियां बंद रहीं। नगर की दूध सहकारी समिति के अध्यक्ष रतन सिंह ने बताया कि जब तक संघ हमारी मांगें नहीं मानेगा तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी तरफ हड़ताल से दूध प्रदायक किसान परेशान हैं।

किसान रमेश पाटीदार का कहना है कि जिस तरह कुछ जिम्मेदार लोगों ने तिलहन संघ का बंटाढार कर दिया है, उसी तरह आने वाले समय में भोपाल दुग्ध संघ का कर दें। दुग्ध समिति के सचिव मनोहर सिंह ने बताया कि नगर के अलावा कजलास, बमुलिया, बीसूखेडी, खजुरिया, सेकूखेड़ा, कुंडियानाथू, मउडि़या, मेहतवाड़ा, बरछापुरा गांव की दूध समितियां भी दो दिनों से बंद हैं।

दुग्धशीत केंद्र में कम पहुंचा दूध: तहसीलक्षेत्र में करीब 190 दुग्ध सहकारी समितियां संचालित हैं। जहां पर उत्पादक दूध लेकर आते हैं। इन समितियों में सुबह और शाम मिलाकर भैंस गाय का करीब 50 हजार लीटर दूध का संग्रह होकर दूध शीत केंद्र पहुंचता है। जबकि शुक्रवार को दूध समितियां बंद होने से केंद्र में करीब 10 हजार लीटर तो शनिवार को 6 हजार लीटर ही दूध पहुंचा।

अमानक स्तर का दूध नहीं खरीदा जाएगा

^राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार अमानक स्तर का दूध खरीदना मुश्किल है। यह केंद्र सरकार का अधिनियम है। इसके बाद भी हड़ताल की जा रही है। भोपाल दुग्ध संघ मानक स्तर का ही दूध खरीदेगा। समिति बंद होने से 10 हजार लीटर ही दूध संग्रह हुआ है। आरसीसुगंध, प्रबंधक, दुग्ध शीत केंद्र