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निरीक्षण के बाद भी कक्षाओं में नहीं पहुंच रहे शिक्षक

6 वर्ष पहले
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{शासकीय स्कूलों से लगातार घट रही बच्चों की उपस्थिति

{निजी स्कूलों के रिकार्ड में की जा रही है गड़बड़ी

कार्यालयसंवाददाता | आष्टा

शासन शिक्षा विभाग के लाख प्रयास के बाद भी स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है। जबकि प्रतिभा पर्व ने स्कूल शैक्षणिक गुणवत्ता की पोल खोल दी है। इसके अलावा शिक्षा अधिकारियों द्वारा किए जा रहे लगातार निरीक्षण के बाद भी शिक्षक अनुपस्थित मिल रहे हैं। यही कारण है कि स्कूलों में लगातार बच्चों की उपस्थिति कम होती जा रही है। इसका फायदा निजी स्कूल उठा रहे हैं जो अपने रिकार्ड में फेरबदल कर रहे हैं।

शासन साक्षरता का प्रतिशत बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके नुमाइंदे ही व्यवस्था को चौपट करने में लगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय स्कूलों की हालत यह है कि समय के बाद स्कूल खुल रहे हैं तो समय से पहले ही स्कूल बंद हो जाते हैं। इन स्कूलों में अपडाउन करने वाले शिक्षक स्कूलों में बच्चों की जल्दी छुटटी करने के बाद ताले डालकर घर भाग जाते हैं। यहीं कारण है कि गांव में शिक्षकों की लापरवाही के कारण पढ़ाई व्यवस्था ठप होने से पालक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पहुंचा रहे हैं। यह जरूर है कि एक तरफ शासन सरकारी स्कूलों में बच्चों को आकर्षित करने के लिए गणवेश से लेकर किताबें, साइकिल, छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की गई है। शिक्षा सत्र के शुरूआती वर्ष में गांव में पालक इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए बच्चों को स्कूल भेजते हैं उसके बाद प्राइवेट स्कूलों में भेजना शुरू कर देते हैं। यदि जांच की जाए तो जिन बच्चों के नाम सरकारी स्कूल में है वहीं नाम निजी स्कूलों में दर्ज हैं। जबकि शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में जांच नहीं करता है। इन दिनों बीईओ संकुल प्रभारी प्रायमरी मिडिल स्कूलों का निरीक्षण लगातार कर रहे हैं। उसमें शिक्षकों की लापरवाही उजागर हुई है। साथ ही शिक्षकों की अनुपस्थिति खबरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों में ताले तथा शिक्षक अनुपस्थित मिल रहे हंै। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कूलों में किस तरह से पढ़ाई होती होगी। जबकि बोर्ड परीक्षाओं से लेकर अन्य सभी कक्षाओं की परीक्षाएं अगले महीने से शुरू हो जाएगीं। स्कूलों में इस तरह की स्थिति होने से इसका सीधा असर परीक्षा के परिणाम पर पड़ सकता है।

स्कूलों में घटती बच्चों की उपस्थिति पर नहीं दे रहे ध्यान

शासकीयस्कूलों में शिक्षकों के लापरवाह रवैये के कारण बच्चों की उपस्थिति भी लगातार घट रही है। शनिवार को भास्कर टीम ने नजदीकी गांव मुगली मिडिल स्कूल का निरीक्षण किया। वहां पर कक्षा छटीं से आठवीं तक में 85 बच्चें दर्ज हैं। जबकि शनिवार को उसमें से 32 बच्चें ही उपस्थित थे। इतने बच्चों पर तीन शिक्षक पदस्थ हैं। शनिवार को एचएम हरिनारायण अटेरिया संकुल केंद्र पर मिटिंग में जाने से दोनों शिक्षक कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों को एक साथ लेकर स्कूल के बाहर बैठे हुए थे। शिक्षक कमल सिंह ठाकुर ने बताया कि हर दिन बच्चे जाते हैं, लेकिन आज उनकी उपस्थिति कम है। उल्लेखनीय है कि इस तरह की स्थिति कई जगह बनी हुई है।

निजीस्कूलों का होगा निरीक्षण

^सरकारीस्कूलों के अलावा निजी स्कूलों में चल रहे गड़बड़ झाले को देखते हुए उनका भी निरीक्षण किया जाएगा। डॉ.ओपी दुबे, बीईओ

पढ़ाई हो रही चौपट

ग्रामीणक्षेत्रों की स्कूलों का लगातार निरीक्षण नहीं होने से लंबे समय से यह सब हो रहा है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं शिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा है। इस कारण परीक्षा के दौरान जिस परिणाम की उम्मीद की जाती है उस तरह का नहीं पाता है। इसका नतीजा प्रतिभा पर्व के रिजल्ट में देखने को मिला है। उसके बाद भी शिक्षक अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं कर रहे हैं।

दर्जनभर स्कूलों में शिक्षक अनुपस्थित

कईगांवों के स्कूलों में शिक्षक दूसरी जगहों से अपडाउन कर रहे हैं। इसके चलते वह स्कूलों में समय पर नहीं पहुंच पाते हैं। वहीं शाम को स्कूल का समय पूरा होने से पहले ही वापस चले जाते हैं। इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई चौपट हो रही है। इसको लेकर बीईओ डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने दो फरवरी से ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण भी शुरू किया था। इसमें दलपतपुरा, जताखेड़ा, कासमपुरा में कहीं स्कूल में ताले डले थे तो कहीं पर शिक्षक अनुपस्थित मिले थे। इसके बाद चार फरवरी को झिकड़ी, मनीपुरा में भी शिक्षक अनुपस्थित मिले थे। 6 फरवरी को पीपलिया सलारसी गवाली गांव में भी शिक्षक अनुपस्थित मिले थे। इन शिक्षकों के एक दिन का वेतन काटने की अनुशंसा की गई है।

मुगली मिडिल स्कूल में कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों की संख्या बहुत कम है।