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लाखों खर्च करने के बाद भी नहीं मिल रही लोगों को शासन की सुविधाएं

6 वर्ष पहले
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तहसील क्षेत्र में ऐसे एक दर्जन बड़े गांव हैं जहां पर गर्मी के मौसम में जल संकट बना रहता है। इसके लिए शासन स्तर से नलजल योजना शुरू करने के लिए संशाधनों पर लाखों रुपए खर्च किए हैं। इसके बाद भी यहां की समस्याओं में कोई बदलाव नहीं आए हैं। इन गांवों में बनकर तैयार खड़ी पानी की टंकियां बेकार साबित हो रही हैं।

शासन ने गांव के लोगों की पानी की परेशानी को देखते हुए तहसील के बड़े गांवों में पानी की टंकियां स्वीकृत की थी। उनका निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी चालू नहीं हो सकी हंै। वहीं गांव मेहतवाड़ा में बनी 15 लाख रुपए की लागत की पानी की टंकी का लोकापर्ण तात्कालीन प्रभारी मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने 19 फरवरी 2009 को किया था। जो अभी तक चालू नहीं हो सकी है। जल संसाधन विभाग ने टंकी को ग्राम पंचायत के हैंड ओवर भी कर दी है। हालांकि उसकी पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। जिससे वह चालू नहीं हो सकी है। इसी प्रकार ग्राम कोठरी में 38 लाख रुपए की लागत से बनी पानी की टंकी चालू तो हो गई है, लेकिन सूचारू रूप से नहीं हो सकी है। वहीं गांव खामखेड़ा बैजनाथ में 1995 में बनी पानी की टंकी अभी तक चालू नही हो पाई है। टंकियों का निर्माण कार्य तो पूरा हो चुका है, उसे संबंधित विभाग ने ग्राम पंचायतों के हैंड ओवर भी कर दी है, लेकिन सरपंचों की लापरवाही के कारण नलजल योजना चालू नहीं हो सकी हैं। इस कारण ग्रामीणों को पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह गांव सिद्दीकगंज में भी पानी की समस्या को देखते हुए 10 लाख रुपए की लागत से टंकी बनाई गई, लेकिन डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी इससे पानी का सप्लाई शुरू नहीं हो सका है। यहां पर टंकी से निकली पाइप लाईन को मेन पाईप लाईन से नहीं जोड़ा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टंकी से पानी का सप्लाई शुरू होता है तो आधे गांव के लोगों को इसका फायदा मिल सकता है।

इन गांवों में बनी टंकियां

पीएचई विभाग द्वारा गांव कुरावर में 60 हजार लीटर क्षमता की लागत 7 लाख 65 हजार रुपए, खामखेड़ा बैजनाथ में 51 हजार लीटर क्षमता की 10 लाख रुपए, मेहतवाड़ा में 17 लाख रुपए की, कोठरी में 80 हजार लीटर क्षमता लागत करीब 38 लाख रुपए, मैना में 1 लाख 80 लीटर क्षमता की करीब 60 लाख रुपए, जावर में 220 लीटर क्षमता 12.55 लाख रूपए, बरछापुरा में टंकी निर्माणधीन है।

पर्याप्त साधन के बाद भी परेशान हो रहे हैं ग्रामीण

विकासखंड के गांव मेहतवाड़ा, कजलास, कुरावर, खामखेड़ा बैजनाथ, मैना, कोठरी, खाचरोद, खामखेड़ा जत्रा, सिद्दिकगंज, डाबरी, सिंगारचोरी, सिद्दीकगंज, नानकपुर आदि गांवों में पानी की किल्लत के कारण लोगों को इधर-उधर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। इनमें बच्चों से लेकर महिला तक जुटे हुए है।

लाखों रुपए खर्च करने के बाद पानी की टंकियां तो बना दीं लेकिन इनका फायदा आज तक नहीं मिल पा रहा है।