पहचान नाम से नहीं काम से होती है
आदमीकी पहचान नाम पद मिलने से नहीं अपितु कार्य और सदकार्य से होती है। जिस प्रकार पूरे विश्व में भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा का प्रचार कर अपना विशेष स्थान बनाया है। उसी तरह से मनुष्य को भी धर्म के पथ पर चलकर अच्छा कार्य करना चाहिए। इससे ही उसका उद्धार होता है।
यह बातें राष्ट्रीय संत पुलक सागर महाराज ने पुष्पगिरी प्रवेश के अवसर पर आशीष वचन के दौरान कहीं। आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज सहित अन्य संतों ने मुनिश्री को पुष्पगिरी के महाविद्यालय परिसर से गाजे-बाजे के साथ एक जुलूस के रूप में पुष्पगिरी तक लेकर आए। वहां उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं तथा महिला जागृति मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष मीना झांझरी, पुलक चेतना मंच के अध्यक्ष प्रदीप बडज़ात्या, आष्टा पुलक चेतना मंच के अध्यक्ष जितेंद्र जैन, महिला जागृति मंच अध्यक्ष अंजू जैन, मनीष पोरवाल, मनोज जैन सुपर, नरेंद्र गंगवाल, श्रद्धा गंगवाल, सीमा गंगवाल आदि ने आचार्य संघ को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
आष्टा आने की विनती की- मुनश्री को मां पार्वती की नगरी आष्टा में पधारने के लिए पुलक जन चेतना मंच महिला जागृति मंच की टीम ने विनती की।
वहीं आचार्यश्री को श्रीफल भी भेंट किया। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि पांच वर्षो के पश्चात इस पवित्र भूमि पर सिर झुकाने का अवसर मिला है।