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राशन दुकानों में मनमर्जी

6 वर्ष पहले
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18 वार्डों के बीच 6 दुकानों से होता है राशन का वितरण

कार्यालयसंवाददाता | आष्टा

नगरएवं ग्रामीण क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी तथा लापरवाही के कारण उचित मूल्य की दुकानों के समय पर नहीं खुलने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नगर के 18 वार्डों के बीच 6 दुकानें ही संचालित हो रही हैं। दुकानों की कमी के कारण राशन के लिए उपभोक्ताओं को लंबी दूरी तय करना पड़ती है। जबकि अब नई दुकानों के आंवटन पर रोक लगी हुई है।

सरकारी उचित मूल्य की दुकानों में चल रही लापरवाही के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर में 18 वार्ड हैं। उस मान से उचित मूल्य की दुकानें मात्र छह हैं। इनमें से तीन दुकानें मार्केटिंग सोसायटी में ही स्थित हैं। इस कारण एक दर्जन वार्डों के उपभोक्ताओं को राशन लेने के लिए एक से दो किमी दूर तक आना पड़ता है जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

साथ ही इनमें से नगर की तीन तथा गांव की अन्य दुकानों का खुलने का समय निर्धारित नहीं होने से उपभोक्ता भटकते रहते हैं। इस तरह गांव में सेल्समेनों की मनमर्जी के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था को देखने के लिए आष्टा में दो अधिकारी पदस्थ हैं, लेकिन उनके द्वारा निरीक्षण नहीं करने के कारण दुकान संचालकों की मनमानी चल रही है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। खाद्य अधिकारी मुख्यालय पर नहीं रहने के कारण इनका आधा समय तो आने-जाने में ही खत्म हो जाता है। आधा समय कार्यालय में विभागीय कार्य निपटाने में खत्म हो जाता है। राशन की दुकानें कब खुलती हैं ओर कब बंद होती हैं। इनका कोई समय नहीं है। कई बार दुकान विक्रे ता समय पर दुकान नहीं खोलने के बाद भी उपभोक्ताओं को यह कहकर मना कर दिया जाता है कि राशन का आंवटन समाप्त हो गया है। जबकि उपभोक्ताओं को राशन मिल ही नहीं पाता है और उससे अगले महीने आने का कह दिया जाता है।

सोसायटी में तीन उचित मूल्य की दुकानें संचालित हैं जिनमें एक दर्जन वार्डों के उपभोक्ताओं को राशन मिलता है।