गांवों तक लोडिंग वाहनों से आवाजाही
इस समय शादियों का सीजन चलने से नगर से लेकर गांवों तक लोडिंग वाहनेां में सवारियों को ढोया जा रहा है। जबकि क्षेत्र में आए दिन हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसके बाद भी पुलिस द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जबकि तहसील के गांवों में इस समय जमकर ओवर लोडिंग की जा रही है। क्षेत्र में चलने वाले दूध वाहनों एवं लोडिंग वाहनों में ग्रामीण यात्रियों को भेड़ बकरियों की तरह भरकर रहे है। इससे कभी भी बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। इसके अलावा टै्रैक्टर-ट्राली में भी बड़ी संख्या में महिला बच्चों को भरा जाता है। जबकि इस प्रकार के कई बार गंभीर हादसें हो चुके हैं। गौरतलब है कि नगर से चलने वाली बसों के अलावा भी जिन गांवों में बसों की संख्या अधिक नहीं है वहां के लोग दूध के वाहनों में आते-जाते हैं। जिससे इन वाहनों में जमकर ओवर लोडिंग की जाती है।
दूध वाहन हैं सहारा
सबसे ज्यादा ओवर लोडिंग सिद्दिकगंज से आष्टा चलने वाले दुध वाहन सिद्दीकगंज से खाचरोद तक तथा अन्य गांव या आष्टा तक जाने वाले यात्रियों को दुध पिकअप वाहन में करीब 40 यात्रियों को ठसाठस भर लेते हैं। इसके अलावा मेटाडोर में तो छतों पर भी सवारियों को बैठा लिया जाता है। ओवर लोड सवारियां भरी होने के कारण कई बार बेलेंस गडबड़ाने के कारण दुर्घटना होते-होते बची है। इसी प्रकार जावर से आष्टा चलने वाली यात्री वाहनों के भी यही हाल हैं। वाहन संचालक अत्याधिक यात्रियों को मिनी बस या जीप के आसपास पैरदान पर खड़ा कर लेते हैं। इस कारण कभी भी हादसा घटित हो सकता है। यही हाल नगर से ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली यात्री बसों का है। ग्रामीणों के पहुंचते ही छतों पर सवारियों को बैठा लेते हैं। इस ओर पुलिस प्रशासन भी ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं नए बस स्टैंड पर ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाली जीपों में भी पुलिस के सामने ही वाहनों में सवारियों को भेड़ बकरियों की तरह भरा जाता है।
इनमें अधिक खतरा
सबसे अधिक खतरा ग्रामीण क्षेत्रों से इस समय चल रहे विवाह समारोह के कारण बारातें ट्रैक्टर-ट्रालियों में पहुंच रही हैं। इसी तरह कोई आयोजन के समय जाने वाले यात्रियों का रहता है। इस संबंध में टीआई अनिल त्रिपाठी का कहना है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।