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सरकारी संपत्ति का प्रचार-प्रसार के लिए धड़ल्ले से हो दुरुपयोग

6 वर्ष पहले
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{हाईकोर्ट के निर्देशों पर नहीं हो सका नगर में अमल

{ गांवों में नहीं हो रहा आचार संहिता का पालन

कार्यालयसंवाददाता | आष्टा

नगरगांवों में सरकारी भवन अन्य संपत्ति निजी कंपनियों के लिए मनमर्जी का प्रचार करने का साधन बन गई हैं। इसके बाद भी इस तरफ संस्थाएं शुल्क वसूलने की ओर ध्यान नहीं दे रही हैं। सबसे अधिक कई सरकारी स्कूलों की दीवारों पर बगैर अनुमति के प्राईवेट संस्था से लेकर निजी कंपनियों के बैनर पोस्टर लगाने के साथ स्लोगन लिख दिए हैं। साथ ही लंबे समय से कई जगहों पर सड़क किनारे अवैध होर्डिंग खड़े हुए हैं।

इस समय त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अभी आचार संहिता लागू बनी हुई है। जबकि गांवों में आचार संहिता का पालन होते हुए नहीं देखा जा सकता है। क्योंकि यहां पर उम्मीदवार अपने नाम का पंपलेट शासकीय दीवारों पर चस्पा कर आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल, हायर सेकंडरी सहित छात्रावासों की दीवारों पर प्राईवेट स्कूलों से लेकर विभिन्न कंपनियों के विज्ञापन नजर रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन विज्ञापनों के लिए प्राइवेट संस्थाओं कंपनियों द्वारा स्थानीय शिक्षा विभाग से अनुमति भी नहीं ली जाती है। इसके बावजूद जिम्मेदार इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे भवन के दीवार की सुंदरता बिगड़ रही है। वहीं कंपनियों के लिए वह मुफ्त में प्रचार-प्रचार का भी माध्यम बन गई है। इसके अलावा नगर सहित अधिकांश सड़क किनारे ही अवैध रूप से होर्डिंग खड़े हुए हैं। कई बार तेज आंधी या बारिश में यह होर्डिंग दुर्घटना की वजह भी बने हैं। ऐसे होर्डिंगों को हटाने को लेकर हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया था। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि तीन दिन में इन होर्डिंगों को हटाया जाए। आदेश जारी हुए एक दो माह से भी अधिक समय गुजर गया है, लेकिन अभी तक जिम्मेदारों ने होर्डिंग को हटाने का सिलसिला प्रारंभ नहीं किया है।

बिना अनुमति के शासकीय दीवारों पर स्लोगन लिखने के साथ पंपलेट चिपका दिए गए हैं।