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बिना पुण्य के मनुष्य को कुछ नहीं मिलता : माताजी

5 वर्ष पहले
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व्यक्ति को नित्य स्वाध्याय करना चाहिए। अहंकार करने वाले का पतन निश्चित है। संसार में प्राणी आया है तो संयोग-वियोग भी निश्चित होगा। मुनिराज किसी के बंधन में नहीं रहते हैं वे तो रमता जोगी बहता पानी की तरह भ्रमण कर भगवान के बताए हुए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

यह बातें पार्श्वनाथ दिगंबर जैन समाज मंदिर किला पर आयोजित प्रवचन में पुराणमति माताजी व दिव्यमति माताजी ने कहीं। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री का अधिकांश समय नगरीय क्षेत्र के स्थान पर जंगलों में अधिक रहता है। आचार्यश्री के दर्शन व आशीर्वाद लेने के लिए प्रत्येक व्यक्ति अकेले में उनसे मिलना भी चाहता है, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। बिना परीक्षा के जहां शिक्षा के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ा जाता है। उसी प्रकार मोक्षमार्ग में भी बिना परीक्षा के सफलता नहीं मिलती है। भक्ति रूपी चाबी से 48 तालों में बंद मानतुंगाचार्य बाहर निकले।

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