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अवैध उत्खनन से दोहरा नुकसान

7 वर्ष पहले
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{ नदी के किनारे के क्षेत्रों से मिट्टी की हो रही खुदाई

कार्यालयसंवाददाता | आष्टा

पार्वतीनदी में पानी कम होते ही जगह-जगह से रेत का अवैध उत्खनन शुरू हो गया है। ऐसे में रेत माफिया नदी से रेत निकालकर उसको मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। इससे जहां शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं नदी का अस्तित्व भी बिगड़ता जा रहा है।

प्रशासन और खनिज विभाग की लापरवाही से पूर्व में भी पार्वती नदी को गड्ढों में बदल दिया गया था। जबकि नपा द्वारा रेती घाट से ही पानी सप्लाई के लिए कुआं बनाया गया है उसके आसपास बनाई गई मुंडेर को भी खोदकर रेत निकाल ली गई है। रेत माफिया मनमानी जगह से रेत की खुदाई कर कर रहे हैं। ऐसे में घाट भी ऊबड़-खाबड़ हो गए हैं। ऐसे में नदी किनारे की बस्तियों के लोगों का यहां पर नहाने कपड़े धोने के लिए भी जमावड़ा लगा रहता है। इनमें महिलाओं के साथ उनके बच्चे भी नहाने के लिए आते हैं। ऐसे में हादसे का भी डर बना रहता है। इस घाट पर गड्ढों के कारण पूर्व में डूबने से कई बच्चों की मौत हो भी चुकी है। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में पार्वती नदी के किनारे से मिट्टी की खुदाई कर बेचा जा रहा है। साथ ही ईंट बनाने वाले इस मिट्टी का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। इससे नदी का स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा है। यह स्थिति हर बार निर्मित होने के बाद भी प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं देता है।

पानीचोरी से खाली हो गई नदी

इसबार अल्पवर्षा के चलते तथा पार्वती बैराज के गेट देरी से लगाने के कारण नदी लबालब नहीं हो पाई थी। इसके बाद सिंचाई के लिए पानी चोरी होने के कारण नदी का जल स्तर तेजी से गिर गया। कई जगह पर तो नदी पूरी तरह से खाली हो चुकी है। इन जगहों से रेत माफियाओं ने रेत का अवैध उत्खनन शुरु कर दिया है।

इनघाटों पर हो रहा उत्खनन

नदीका पानी सूखने ही रेत का अवैध उत्खनन तेजी से शुरु हो गया है। पार्वती नदी के शंकर मंदिर घाट, रेस्ट हाउस वाला घाट, भट्टों वाला घाट, रेती घाट सियाखेड़ी, बोरखेड़ा, चुपाड़िया घाट आदि से हर दिन भारी मात्रा में रेत का उत्खनन किया जा रहा है।

खोद दी पहाड़ियां, फिर भी उत्खनन पर नहीं लग रही रोक

नगरसे सटे दो किमी दूर मालीपुरा की पहाडिय़ों को फोरलेन निर्माण के समय मनमाने खनन के चलते खत्म कर दी गई हैं। बावजूद इसके अब भी यहां मुरम का अवैध उत्खनन नहीं थम रहा है। यहां खनन माफियाओं ने